दिल्ली : देशभर में लोकसभा और सभी विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की दिशा में केंद्र सरकार की पहल तेजी से आगे बढ़ रही है। इस उद्देश्य से गठित संसद की संयुक्त समिति व्यापक स्तर पर सुझाव जुटा रही है। समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने बताया कि अब तक विभिन्न सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से प्राप्त अधिकांश सुझाव इस व्यवस्था के पक्ष में रहे हैं।
समिति ने गोवा के मुख्यमंत्री, राज्य मंत्रिपरिषद के सदस्यों तथा कई राज्यों के विशेषज्ञों से भी विचार-विमर्श किया है। लक्ष्य है कि वर्ष 2029 के आम चुनाव तक नई चुनाव प्रणाली को लागू करने की रूपरेखा तैयार कर ली जाए। समिति का मानना है कि अलग-अलग समय पर होने वाले चुनावों के कारण प्रशासनिक संसाधनों, सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी खर्च पर भारी दबाव पड़ता है। यदि सभी चुनाव एक साथ कराए जाएं तो सरकारी धन की बड़ी बचत संभव होगी, जिसका उपयोग विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं में किया जा सकेगा।

इसके अलावा, लगातार चुनावी प्रक्रिया का असर उद्योग, व्यापार और पर्यटन गतिविधियों पर भी पड़ता है। आदर्श आचार संहिता लागू होने से कई परियोजनाओं की गति धीमी हो जाती है। शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होती है, क्योंकि चुनावी कार्यों में बड़ी संख्या में शिक्षकों की तैनाती की जाती है, जिससे विद्यालयों में नियमित पठन-पाठन बाधित होता है और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।






