जमशेदपुर : जिला पुलिस और क्षेत्र के विधायक पूर्णिमा साहू की निष्क्रियता के बीच परिजनों ने तीसरे दिन सूरज का शव नदी से ढूंढ निकाला है।घटना 22 अप्रैल को घटित हुई थी जब दोपहर 3 बजे बाबूडीह के रहने वाले तीन दोस्त निखिल महानंद मुखी,सूरज शांडिल और सूरज मछुआ नदी में नहाने गए, इसी दौरान निखिल और सूरज डूब गए जबकि सूरज मछुआ किसी तरह बच निकला।

जिसकी सूचना पर सिदगोड़ा पुलिस घटना स्थल पर पहुंची और थाना प्रभारी द्वारा NDRF की टीम बुलाने का आश्वासन दिया गया, लेकिन टीम इन तीन दिनों में भी नहीं पहुंच पाई और ना ही स्थानीय गोताखोर ही पहुंचे, हालांकि दूसरे दिन सोनारी के 5 मछुआरों को पुलिस ने शव खोजने के लिए लाया गया लेकिन वे शव ढूंढने में नाकाम रहे। जिसके बाद परिवार वालो ने ही बस्ती के युवकों के साथ मिलकर निखिल का शव नदी से ढूंढ निकाला,जिसके बाद पुलिस की निष्क्रियता के खिलाफ बस्ती वासी खासे नाराज दिखे।इधर सूरज की तलाश जारी रही और तीसरे दिन सुबह 400 मीटर दूर लाल भट्ठा काला पत्थर नदी से सूरज शांडिल का शव को परिजनों ने बाहर निकाला। विधवा मां का घर का इकलौता सबसे छोटा बेटा का शव देख चीख पुकार मच गई,वही बस्ती वासीयो का विधायक पूर्णिमा दास साहू के खिलाफ आक्रोश फूट पड़ा। इनका आरोप था उनसे जब सहयोग मांगा गया था तो सिर्फ आश्वाशन ही दे रही थी कई बार फोन से और घर जाकर भेंट करने पर यह कह कर लौटा दिया जाता था कि एक शव मिल गया है और कुछ नहीं किया जा सकता,बस्ती वासी इतना आक्रोशित थे कि अब उसे वोट नहीं देने की बात कह डाली,इनका कहना था कि चुनाव के दौरान हाथ जोड़ कर वोट मांगने आई थी और जब घर का दो चिराग बुझ गया तो परिजनों से मिलने तक नहीं आई।वही पुलिस का भी सहयोग नहीं मिलने से नाराज बस्तीवासियों ने शव को बिना पोस्टमार्टम कराए अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया गया।लोग यह भी कहते दिखे कि गरीब परिवार का होने का नतीजा ही है कि आज उन्हें यह भुगतना पड़ा है।




