नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे को रद्द करने का अनुरोध किया गया था। यह मुकदमा उनके द्वारा कथित तौर पर एक नाबालिग बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर करने को लेकर दर्ज किया गया था। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने अंसारी के आचरण की आलोचना करते हुए इसे “प्रचार का प्रयास” करार दिया। अदालत ने कहा कि राजनेताओं को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और पीड़िता से मिलने के दौरान केवल एक या दो व्यक्तियों के साथ जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि समर्थकों के साथ अस्पताल जाने और पीड़िता की जानकारी साझा करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। अदालत की आलोचना के बाद अंसारी के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। मामला 28 अक्टूबर, 2018 का है, जब जामताड़ा विधायक अंसारी और उनके समर्थकों ने बलात्कार पीड़िता और उसके परिवार के साथ एकजुटता दिखाने के लिए अस्पताल का दौरा किया था।

इस दौरान उन्होंने कथित रूप से पीड़िता का नाम, पता और तस्वीरें मीडिया को साझा कीं। झारखंड हाईकोर्ट ने 6 सितंबर, 2024 को अंसारी की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने दुमका की निचली अदालत द्वारा 21 नवंबर, 2022 को भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो अधिनियम के तहत आरोप तय करने के आदेश को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।




