बिहार : बिहार के लखीसराय में पुनर्परीक्षा के दौरान उजागर हुए परीक्षा माफिया प्रकरण की जांच में लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह केवल संपन्न परिवारों के युवाओं को नहीं, बल्कि प्रतिभाशाली और संघर्षशील विद्यार्थियों को भी अपने जाल में फंसा रहा था।
ऐसे छात्र-छात्राएं, जिनमें आगे बढ़ने की क्षमता तो होती है, लेकिन आर्थिक कठिनाइयों और सीमित संसाधनों के कारण वे कई बार गलत लोगों के प्रभाव में आ जाते हैं। मामले में गिरफ्तार युवती पूनम कुमारी की कहानी भी कुछ ऐसी ही तस्वीर पेश करती है। उसके परिवार का कहना है कि उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की कोई जानकारी नहीं थी। पूनम के पिता बालेश्वर राणा ने बताया कि बेटी की पढ़ाई जारी रखने के लिए वे हर महीने आर्थिक सहायता भेजते थे।

बातचीत के दौरान वह हमेशा पढ़ाई में व्यस्त होने की बात कहती थी। इसी वजह से लंबे समय से उसके घर नहीं आने पर भी परिवार को कोई संदेह नहीं हुआ। बाद में पता चला कि वह वाराणसी से लखीसराय पहुंच चुकी थी। वहीं, पूनम की मां मालती देवी ने आशंका जताई कि उनकी बेटी किसी संगठित नेटवर्क के प्रभाव में आ गई होगी। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि युवती इस पूरे घटनाक्रम में किस परिस्थिति में शामिल हुई।






