Saraikela (संजीव मेहता) : नवरात्रि के पावन अवसर पर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर का परिसर भजन, संगीत और नृत्य की मधुर ध्वनियों से गुंजायमान हो उठा. मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने प्रतिदिन सुबह और शाम आयोजित भजन-कीर्तन में छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया. प्रतिदिन भजन संध्याओं में पारंपरिक देवी गीतों से लेकर आधुनिक शैली में प्रस्तुत भक्ति संगीत तक की प्रस्तुति की जा रही है. “जय अम्बे गौरी,” “ओ माँ तेरे भक्त जनों पर” जैसे गीतों ने वातावरण को भक्तिमय बना रहा है. ढोलक, मंजीरा, हारमोनियम और बांसुरी की मधुर स्वर लहरियों ने पूरे कार्यक्रम को और भी प्रभावशाली और मनमोहक बना दिया.
* महाष्टमी पर विधिवत हुआ पूजन- महाअष्टमी के अवसर पर सुबह से हीं माता का पूजन विधिवत और पुरे अनुष्ठान के साथ शुरू हुआ. जिसमें संस्कृत श्लोक और ढाकी की थाप पर पुरा परिसर भक्तिमय माहौल से सरोवर हो गया. दोपहर में महाप्रसाद का आयोजन किया गया जिसमें संस्थान के सभी शिक्षक, कर्मचारी, एवं महिलाओं ने प्रसाद ग्रहण किया. महाअष्टमी के अवसर पर संध्या भजन, नृत्य और संगीत का शानदार आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत में जहां इंद्राणी सुत्रधर ने दुर्गा स्तुति की और बंगला गाना गा कर माहौल को संगीतमय कर दिया वहीं संस्थान के निदेशक प्रो.(डॉ) गौतम सूत्रधर ने गिटार पर इंसटरूमेंटल गीत की धुन पर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया. साथ ही साथ अपने शानदार आवाज में हेमंत दा का गाना ” ना तुम मुझे जानो न हम तुम्हें जाने… गाकर माहौल को खुशनुमा कर दिया.

* गरबा की रही धूम- संगीत की धुन पर जब संस्थान के उपकुलसचिव सुनील कुमार भगत एवं अनामिका दिक्षित ने पारंपरिक गरबा और डांडिया नृत्य प्रस्तुत किया, तो पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा. रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में प्रस्तुत नृत्य ने न केवल दर्शकों का मन मोह लिया बल्कि नवरात्रि पर्व की सांस्कृतिक झलक को जीवंत कर दिया. समूह नृत्यों के दौरान वाद्ययंत्रों और ताली की तालमेल ने ऐसा समां बांधा कि उपस्थित जन भी झूमने पर मजबूर हो गए जिसमें संस्थान की महिलाओं द्वारा “डाक बाजा कशोर बाजा…..और शानदार प्रस्तुति दी गई. कार्यक्रम के दौरान कैम्पस के कई शिक्षकों, बच्चों और महिलाओं ने शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियां दीं. स्वर और लय के सुंदर संगम ने उपस्थित लोगों को भारतीय संगीत परंपरा का अद्भुत अनुभव कराया. कई छात्रों ने स्वरचित भक्ति गीत भी प्रस्तुत किए. जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा. पूरे आयोजन में भक्ति और उत्साह का संगम देखने को मिला. भजन और संगीत जहां श्रद्धालुओं को अध्यात्म से जोड़ रहे थे, वहीं नृत्य की प्रस्तुतियों ने नवरात्रि की उमंग और उल्लास को चरम पर पहुँचा दिया. संस्थान प्रशासन ने बताया कि इन आयोजनों का उद्देश्य युवाओं को पढ़ाई के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और परंपरा से भी जोड़ना है. भजन, संगीत और नृत्य की ये प्रस्तुतियां कैंपस के लिए यादगार क्षण बन गईं.




