रांंची : झारखंड में नक्सलियों पर पुलिस की लगातार कार्रवाई से उनका दबदबा तेजी से कम हो रहा है। हाल ही में भाकपा माओवादी संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार से शांति वार्ता की अपील की है। माओवादियों की केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय ने बयान जारी करते हुए कहा है कि अगर सुरक्षा बलों की कार्रवाई बंद की जाती है, तो वे बिना किसी शर्त के बातचीत को तैयार हैं। उन्होंने मांग की है कि विभिन्न राज्यों में चल रही सैन्य गतिविधियों को रोका जाए और नए सुरक्षा शिविर न बनें।

राज्य में पिछले एक दशक में नक्सल प्रभाव वाले थाना क्षेत्रों की संख्या 131 से घटकर अब सिर्फ 18 रह गई है। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार सात जिलों में ही अब इनकी मौजूदगी बची है। पिछले पांच वर्षों में 69 नक्सली मारे गए, जबकि इस दौरान 19 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए। फिलहाल राज्य में सात नक्सली दस्ते सक्रिय हैं, जिनमें पश्चिमी सिंहभूम, लातेहार, चतरा और पलामू प्रमुख हैं। केंद्र सरकार ने झारखंड के पांच जिलों को माओवादी गतिविधियों से प्रभावित मानते हुए विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया है, जिनमें पश्चिमी सिंहभूम सबसे अधिक संवेदनशील माना गया है।




