रांची : देश का युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत और भविष्य की नींव माना जाता है। लेकिन जब यही युवा नशे की गिरफ्त में आने लगे, तो यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज के भविष्य पर गहराता संकट बन जाता है। आज झारखंड सहित देश के अनेक हिस्सों में ब्राउन शुगर, गांजा, सिंथेटिक ड्रग्स और अन्य मादक पदार्थों का फैलता जाल युवाओं के कदमों को भटका रहा है। नशे में मचलते ये पांव अब सफलता की ओर नहीं, बल्कि अपराध, बीमारी और बर्बादी की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
पुलिस समय-समय पर ड्रग्स तस्करों और पेडलरों की गिरफ्तारी करती है। बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ भी बरामद किए जाते हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लगातार कार्रवाई हो रही है, तब भी नशे का कारोबार क्यों नहीं थम रहा? धंधेबाज पकडाते हैं ,लेकिन धंधा बंद नहीं होता आखिर क्यों ? क्या इस धंधे की जड़ें कितनी गहरी है कि, कानून के हाथ नहीं पहुंच पा रहे? नशे की लत केवल युवाओं की सेहत नहीं छीनती, बल्कि परिवारों की खुशियां, सामाजिक संस्कार और आर्थिक स्थिरता भी नष्ट कर देती है। बढ़ती चोरी, लूट, हिंसा और सड़क दुर्घटनाओं के पीछे भी कई मामलों में नशे की भूमिका सामने आती है।

यदि समय रहते इस चुनौती पर निर्णायक प्रहार नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इसकी सबसे बड़ी कीमत चुकाएंगी। आज आवश्यकता केवल छापेमारी और गिरफ्तारी की नहीं, बल्कि नशे के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की है। प्रशासन, पुलिस, अभिभावकों, शिक्षण संस्थानों और समाज को मिलकर ऐसी व्यापक रणनीति बनानी होगी, जिससे युवाओं को नशे की दलदल से बाहर निकालकर शिक्षा, रोजगार, खेल और सकारात्मक जीवन की ओर प्रेरित किया जा सके। क्योंकि यदि युवाओं के पांव नशे में डगमगाते रहे, तो राष्ट्र की प्रगति की राह भी आसान नहीं होगा। घर परिवार, समाज, युवा यूं ही बर्बाद होते रहेंगे। इनके नशे में मचलते पांवों में बेंड़िया लगाना होगा, और ये हम सभी की जिम्मेदारी है। ताकि घर परिवार समाज राष्ट्र सभी खुशहाल सुरक्षित रहे।






