सरायकेला : सरायकेला–खरसावां जिले के उत्पाद विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विभाग द्वारा की जाने वाली छापेमारी में अक्सर अवैध सामग्री तो जब्त हो जाती है, परंतु असली आरोपी बार-बार फरार हो जाते हैं। क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि छापामारी की सूचना पहले ही माफियाओं तक कैसे पहुँच जाती है। अधिकतर मुख्य आरोपी को बच निकलना इस बात की ओर संकेत करता है कि कहीं न कहीं सूचना लीक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उत्पाद विभाग की टीम मौके पर पहुंचती है, लेकिन उससे पहले ही आरोपी अपना ठिकाना खाली कर देते हैं। यदि विभाग की कार्रवाई गुप्त होती, तो माफियाओं के लिए इस तरह बार-बार बच निकलना संभव नहीं होता। ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या ने विभाग की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। कई लोग इसे विभागीय लापरवाही मानते हैं, तो कुछ इसे अंदरूनी मिलीभगत का परिणाम बताते हैं।

इसके अलावा, विभाग द्वारा दर्ज किए गए मामलों में दर्ज फरार आरोपियों की केश की संख्या बहुत ही ज्यादा है, जिससे कार्रवाई का असर खत्म होता जा रहा है। जनता में यह भी चर्चा है कि यदि माफिया पहले ही भाग जाते हैं, तो छापेमारी का उद्देश्य ही अधूरा रह जाता है।इससे क्षेत्र में अवैध कारोबार को बढ़ावा मिलता है। आवश्यकता है कि विभाग अपनी कार्यशैली में पारदर्शिता लाए, गुप्त सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे और दोषियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचे, तभी छापेमारी का असल उद्देश्य पूरा हो सकेगा।या यूं ही छापामारी उत्पाद विभाग की चलती रहेगी और माफियाओं की बल्ले बल्ले होती रहेगी और खुलेआम माफिया चुनौती देते रहेंगे।






