रांची : झारखंड की राजनीति में एक बार फिर से हलचलें तेज हो गई है। झारखंड पीपुल्स पार्टी (JPP) के संस्थापक और पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार को लेकर बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है। जमशेदपुर परिसदन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि 29 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा प्रस्तावित आरोप-पत्र दाखिल होने से पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) को भविष्य की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक नेतृत्व पर गंभीर रूप से विचार करने की कही है।
बेसरा का कहना है कि यदि केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई आगे बढ़ती है और मुख्यमंत्री के खिलाफ कानूनी स्थिति जटिल होती है, तो राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि आरोप-पत्र दाखिल होने के बाद ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं, जिनसे सरकार की कार्यप्रणाली और राजनीतिक संतुलन पर असर पड़े। इसी वजह से उन्होंने JMM को समय रहते संगठनात्मक तैयारी करने की सलाह दी। पूर्व विधायक ने कहा कि किसी भी दल के लिए सत्ता से अधिक महत्वपूर्ण राज्य की स्थिरता और जनता का भरोसा होता है। उन्होंने सुझाव दिया कि पार्टी को ऐसा चेहरा सामने लाना चाहिए जो संभावित राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों के बीच सरकार को सुचारु रूप से चला सके।

उनके अनुसार, यदि नेतृत्व परिवर्तन की आवश्यकता महसूस हो, तो उसे संकट आने के बाद नहीं बल्कि पहले ही तय कर लेना अधिक व्यावहारिक होगा। इस दौरान बेसरा ने बिहार की राजनीति का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि जब पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव कानूनी मामलों में घिरे थे, तब उन्होंने पद छोड़कर अलग व्यवस्था बनाई थी। बेसरा के अनुसार, उस निर्णय का उद्देश्य प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखना था। उन्होंने कहा कि झारखंड में भी ऐसी स्थिति बनने से पहले राजनीतिक परिपक्वता दिखाना आवश्यक है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह भी कहा कि राज्य को अनिश्चितता की ओर धकेलना किसी के हित में नहीं होगा। उनका मानना है कि यदि पार्टी समय रहते रणनीतिक निर्णय लेती है, तो सरकार, संगठन और गठबंधन—तीनों को संभावित अस्थिरता से बचाया जा सकता है। बेसरा के इस बयान के बाद झारखंड की राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है और विपक्ष से लेकर सत्ता पक्ष तक सभी की नजरें अब 29 जुलाई की संभावित ED कार्रवाई पर टिक गई हैं।





