नई दिल्ली : अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में जंतर-मंतर पर ‘जनता की अदालत’ को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (संघ) पर निशाना साधा। उन्होंने भाजपा और संघ के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करते हुए कहा कि भाजपा अब इतनी बड़ी हो गई है कि वह संघ को चुनौती देने लगी है। उन्होंने उदाहरण दिया कि 75 साल की उम्र पार करने के बाद लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को राजनीति से रिटायर कर दिया गया, लेकिन सवाल उठता है क्या यह नियम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी लागू होगा।केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी पर केंद्रीय एजेंसियों जैसे ईडी और सीबीआई का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को धमकाने और सरकारें गिराने का आरोप लगाया।

उन्होंने पूछा कि क्या संघ मोदी सरकार की इन कार्रवाइयों से सहमत है और क्या यह संघ की जिम्मेदारी नहीं है कि वह सुनिश्चित करे कि भाजपा पथभ्रष्ट न हो।इस दौरान मनीष सिसोदिया ने भी अपनी आपबीती साझा की, जिसमें उन्होंने जेल जाने के बाद अपने बैंक खाते बंद होने की बात कही। उन्होंने बताया कि अपने बेटे की फीस भरने के लिए उन्हें दूसरों से पैसे मांगने पड़े। केजरीवाल का यह भाषण पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन और भाजपा-संघ के संबंधों में हो रहे बदलावों पर केंद्रित था, जो आने वाले समय में राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हो सकता है।




