
जमशेदपुर: पूरे झारखंड ही नही भारत के किसी कोने के अस्पताल में यह नियम नही है,की इमरजेंसी में मरीज के साथ माता पिता परिजन मरीज के साथ नही जा सकते।लेकिन जमशेदपुर के tmh ऐसा अस्पताल है। जहां मानवता को दरकिनार कर एक कठोर नियम चलता है।यहां इमरजेंसी के मुख्य द्वार पर कुछ भी हो जाय,कितनी भी मिन्नते कर ले,क्यो ना मरीज के सहयोगी के साथ माता या पिता परिजन हो,क्यो ना मरीज मरणासन्न पर हो लेकिन मरीज के साथ नहीं जाने दिया जाता है । आप अगर उसका विरोध कर दे तो दो चार हट्टा कट्टा सेक्युरिटी जवान आ जाएंगे और धक्का देकर आपको बाहर कर देंगे।ऐसा ही स्तिथि बीती रात देखने को मिली जब एक पिता के इकलौती बेटी का तबियत अचानक बिगड़ने पर आनन फानन में आस पड़ोस के एक बच्ची के सहयोग से tmh लेकर पहुंचे।अब तक तो सब कुछ ठीक था अस्पताल पहुंचने पर एक वार्ड बॉय वाहन से उतारकर उसके बेटी को स्ट्रक्चर में लेकर जाने लगा।लेकिन कुछ कदम पर एक गेट में मौजूद दो महिला सुरक्षा कर्मी ने पिता को रोक दिया। जब उसने कहा की वो जिसे अंदर ले जाया गया है वो मेरी बेटी है। लेकिन उसकी एक ना सुनी कहने लगे उपर से ऑर्डर है। मरीज के साथ एक ही जायेगा।इसी बीच एक पत्रकार ने भी उन लोगो से आग्रह की और नही मानने पर उनका वीडियो भी बनाया। लेकिन उन लोगो का एक ही कहना था कुछ भी कर लो यहां का शासन कुछ और चलता है।इसी बीच वहां पहुंचे सुरक्षा कर्मियों ने पिता की मोबाइल यह आरोप लगाकर जब्त कर ली की इन्ही के कहने पर विवाद हुआ है और खुद भी फोटो खींच रहे थे।सिर्फ इतना ही नही गेट में मौजूद कर्मी को चिराग नामक सुरक्षा विभाग के अधिकारी ने निर्देश दिया की पिता को अंदर नही जाने दिया जाय।
ऐसे में बीमार बेटी अंदर और पिता बाहर, इलाज की क्या स्तिथि है। घंटो बाद भी कुछ पता नही चलने कर पिता ने किसी तरह अस्पताल में मौजूद अन्य लोगो की सहायता से 2 घंटे भर्ती के लिए दो हजार 18 रुपए चुकता कर बेटी को लगभग रात 2 बजे डिस्चार्ज कर ले गए।अब सवाल यह उठता है की आखिर किस सविधान के तहत tmh इस नियम का पालन कर रहा है की इमरजेंसी में भी मरीज के माता पिता परिजन को प्रवेश नही करने दिया जाता है।




