दिल्ली (प्रतीक सिंह) : दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण रेस्टोरेंट अग्निकांड में 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे। कई अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए और अस्पतालों में इलाजरत हैं। इस दर्दनाक, हृदय विदारक लोमहर्ष अग्निकांड के कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि लोगों को जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से छलांग तक लगानी पड़ी।
जहाँ तक सवाल है ,इन मौतों का जिम्मेदार कौन है, होटल के मालिक नगर निगम या प्रशासन, उसका अंतिम उत्तर जांच पूरी होने के बाद ही मिलेगा। फिर भी प्रथम दृष्टया जिम्मेदारी कई स्तरों पर दिखाई देती है। यदि भवन में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया, फायर अलार्म, स्प्रिंकलर, आपातकालीन निकास या अन्य सुरक्षा उपकरण पर्याप्त नहीं थे, तो भवन मालिक, होटल और रेस्टोरेंट संचालक जवाबदेही से नहीं बच सकते। अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की जांच की जा रही है।

दूसरी ओर, यदि संबंधित सरकारी विभागों ने समय-समय पर निरीक्षण नहीं किया या सुरक्षा कमियों के बावजूद संचालन की अनुमति दी, तो प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न भी उठेगा। भारत में अक्सर ऐसे हादसों के बाद यह सवाल उठता है कि क्या नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए थे। आग लगने का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। कुछ रिपोर्टों में बेसमेंट या रसोई क्षेत्र से आग शुरू होने की संभावना बताई गई है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस, दमकल विभाग और अन्य एजेंसियाँ जांच कर रही हैं।
इसलिए अभी किसी एक व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना स्पष्ट है कि यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी, लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के कारण लोगों की जान गई है, तो दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही की भी परीक्षा है। होटल मालिक नगर निगम और प्रशासन कौन है जवाबदेह, कब होगी ऐसी घटनाओ पर रोक लगाने की कार्यवाई।




