
राँची : सियासत में खेल सत्ता की होती है और इसकी केंद्र बिन्दु हुकूमत हासिल करने की ही रहती है, इसे हथियाने के लिए सारा खेल रचा और बनाया जाता है. लेकिन, इस हुकूमत की हकीकत यहीं है कि इस लोकशाही की मालिक जनता होती है.लिहाजा, सभी दल जनता -जनार्दन को ही लुभाने में लगी रहती है.मौज़ूदा वक़्त में झारखण्ड की राजनीति में एक तपिश और ख़ामोशी पसरी हुई है, और अंदर ही अंदर एक उबाल और सवाल भी है कि विधानसभा चुनाव में आखिर किसकी जीत होगी.कथित जमीन घोटाले की तोहमतों से पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बेदाग तो नहीं निकले है. लेकिन, अदालत ने उन्हें सीधे तौर पर इसमे भागीदार नहीं मानी है. इस सूरत में हेमंत को ज़मानत दी गई. उन्होंने जेल से बाहर आते ही सारा ठीकरा भाजपा पर फोड़ा और अपनी जेल यात्रा का जिम्मेदार भगवा पार्टी को बताया.जिसके चलते साजिशन पांच महीने जेल की काल कोठरी में उन्हें बिताने पड़े. हेमंत अब हमलवार मूड में हैं और बीजेपी को बक्शने नहीं जा रहें हैं.हेमंत की गिरफ्तारी के बाद झारखण्ड झुकेगा नहीं के नारे खूब उछले और इसके पोस्टर भी चस्पा जगह -जगह दिखे. हेमंत और उनकी पार्टी भी बार -बार इसे दोहराती रही की झारखण्ड झुकेगा नहीं. अब जबकि हेमंत सोरेन जेल से छूट गए है तो आक्रमक रुख अख्तियार करके विधानसभा में भाजपा के खिलाफ इस्तेमाल करेंगे की इनकी गंदी साजिश और ईडी को कठपुतली बनाकर उन्हें पांच महीने जेल की काल कोठरी में बेबुनियाद रखा गया.हेमंत ने ये बोला भी है कि इनके ताबूत में आख़री किल ठोकने का समय आ गया है और विधानसभा चुनाव में इनका सफाया तय है।
सच्चाई तो ये है कि 31 जनवरी की सर्द रात में ईडी ने बड़गाई के जमीन घोटाले के आरोप में ज़ब हेमंत को गिरफ्तार किया था, तो झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के लिए वो दिन मुसबित और मुश्किल भरे थे. पार्टी टूट और बिखर गई थी. भाभी सीता सोरेन के बीजेपी में जाने और शिबू सोरेन की बढ़ती उम्र और अदालत के चक्कर में जेएमएम की हालत नाजुक और कमजोर सी हो गई थी. हेमंत की जगह मुख्यमंत्री की कमान चंपाई सोरेन के कंधे पर देनी पड़ी और लोकसभा का चुनाव भी हेमंत के बैगर ही पार्टी को लड़ना पड़ा. लेकिन, हेमंत के जेल में रहने से साहनुभूति की लहर उमड़ी और जेएमएम ने तीन सीट जीतकर अपना वज़ूद संथाल और कोल्हान में दिखाया.इस दरमियान पार्टी के लिए संजीवनी हेमंत सोरेन की वाइफ कल्पना सोरेन बनीं और अपने विरोधियों को जमकर ललकारा और जोरदार जवाब दिया. कल्पना ने अपने सियासी कदम गण्डेय विधानसभा उपचुनाव में जीत के साथ आगाज करके किया.मुश्किल वक़्त में कल्पना ने अपने पति के लिए ढाल बनकर आई और पार्टी को एक नई ताकत और जोश भर गई .हेमंत और कल्पना विधानसभा चुनाव में जेएमएम का मुख्य चेहरा होंगे और इन दोनों के प्रहार का जवाब भाजपा के लिए ढूढ़ना होगा. इसमे कोई शक नहीं हैं कि हेमंत की रिहाई से भाजपा को भी परेशानी और असहज महसूस करेगी।
हालांकि, भाजपा के लिए थोड़ी अच्छी बात ये भी हैं कि अगर हेमंत विधानसभा चुनाव के दरमियान भी जेल में रहते तो एनडीए को ज्यादा नुकसान होता क्योंकि इसकी झलक लोकसभा चुनाव में पार्टी को दिख चुकी हैं.सवाल हैं कि विधानसभा चुनाव में किसका पलड़ा भारी रहेगा?. तो यहां साफ है कि आगामी विधानसभा चुनाव की राह भाजपा के लिए आसान नहीं होने वाली हैं. हेमंत की रिहाई और उनके हमले का जवाब देना होगा.उनके कसूर और तोहमतों को गिनना होगा? हेमंत बेदाग इस जमीन घोटाले से नहीं निकले हैं ये आवाम को जतलाना होगा?.इसके साथ ही भाजपा को सटीक समीकरण बिठाकर ही चुनाव लड़ना होगा. पिछले बार के चुनाव की तरह गलतियां नहीं दोहरानी होगी. यहां याद रखने की बात ये भी हैं कि विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे और चेहरे को तरजीह जनता देती हैं. साथ ही जातीय समीकरण और राज्य के मसले भी यहां हावी होते हैं. इसलिए इन चीज़ों की शिनाख्त कर सुनियोजित तरीके से भाजपा को आगे बढ़ना होगा।विधानसभा चुनाव में कुछ महीने का ही समय शेष हैं. और जिस तरह की हवा और हालात हैं इसके मुताबिक मुकाबला जोरदार होगा और इस चुनाव में हेमंत सोरेन एक फेक्टर तो जरूर होंगे.इससे इंकार नहीं किया ज सकता। शिवपूजन सिंह






