जमशेदपुर : जमशेदपुर मे सडक किनारे से फुटपाथ गायब हो चूका है राहगीरों के चलने के लिए अब फुटपाथ नहीं रह गया अब इन फुटपाथों पर प्रशासन के उदासीनता रवैया का कारण दुकानदारों का कब्जा हो गया है. कुछ वर्ष पूर्व टाटा स्टील के द्वारा पूरे शहर के सड़क चौड़ीकरण के दौरान राहगीरों को सुविधाजनक और सुरक्षित तरीके से चलने के लिए फुटपाथ का भी निर्माण कराया गया था लेकिन अब वह फुटपाथ अतिक्रमित हो चुका है.
यह स्तिथि सबसे ज्यादा साकची पत्ता मार्केट से लेकर बारिडीह तक में साफ देखा जा सकता है. उपायुक्त विजय यादव के कार्यकाल में साकची पत्ता मार्केट के सड़क के दोनों छोर पर फुटपाथ अतिक्रमित ना हो इसके लिए बेरीकेटिंग कराया गया था लेकिन इस व्यवस्था को भी धत्ता बताते हुए छोटे-छोटे दुकानदारों ने उस फुटपाथ पर सामान रख कब्जा कर लिए हैं. यही स्थिति सिदगोड़ा पेट्रोल पंप के समीप से लेकर तेरा नंबर क्रॉस रोड तक देखा जा सकता है जहां सब्जी दुकानदार और स्थाई दुकानदार फुटपाथ को कब्जे में ले लिए हैं. वहीं सिदगोड़ा थाना से महज कुछ दूरी पर स्तिथ विद्यापति नगर का भी यही हाल है जहां खटाल वालों ने खाली जमीन पर कब्जा तो किए ही हैं साथ ही फुटपाथ पर ही छोटे-छोटे घर बना के रहने लगे हैं, सबसे ज्यादा विकराल स्थिति तो बारिडीह की है चौक से लेकर मर्सी अस्पताल तक और फिर डिस्पेंसरी तक आपको फुटपाथ नजर ही नहीं आएगा चारों तरफ के फुटपाथ पर दुकानदारों ने ऐसा कब्जा कर लिया है।

जैसे की टाटा स्टील ने लैंड अलॉट कर दी है कहीं चाय की गुमठी तो कहीं फास्ट फूड की दुकान, हद तो बारिडीह दुर्गा पूजा मैदान के पास हुई है जहां चटाई और टोकरी बनाकर बेचने वाले दक्षिण भारतीय परिवार वालों के द्वारा पहले आश्रय घर को रहने के लिए कब्जा कर लिया वहीं व्यवसाय के लिए फुटपाथ पर ही गुमटी खड़ी कर दी. ऐसा नहीं है की इन सभी क्षेत्र के थानेदार और टाटा स्टील के लैंड डिपार्टमेंट को इसकी जानकारी नहीं है,सब की नजर इन पर होती है लेकिन कुछ पैसों को खेल की वजह से फुटपाथ राहगीरों के बजाय इन दुकानदारों के सपुर्द कर दिया गया है वैसे पिछले दिनों शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए उपायुक्त द्वारा दिए गए निर्देश पर जिस तरह से अभियान चलाया जा रहा है इसे लेकर सिटी एसपी ललित मीणा ने कहा कि वर्तमान में सड़क जाम से मुक्ति के लिए कार्य किया जा रहा है दूसरे चरण में इन अतिक्रमित फुटपाथो को भी खाली कराया जाएगा लेकिन वहां के दुकानदार खुद ही अपनी व्यवस्था करने का प्रयास करें ताकि किसी प्रकार के किसी को दिक्कतों का सामना न करना पड़े.इस मामले में समाजसेवी अप्पा राव ने चिंता जताते हुए इस स्तिथि के लिए जिला प्रशासन को दोषी माना है उनका मानना है कि जब बेरोजगारी की इस दौर में लोग दुकान लगाते हैं तो उस समय ही प्रशासन को इस पर रोक लगाना चाहिए लेकिन किसी कारणवश अनदेखी कर देते हैं और जब ए दुकानदार परिवार के भरण पोषण के लिए निश्चित हो जाते हैं तो फिर इन्हें उजाड़ने का कोशिश किया जाता है जो गलत है ऐसे में उनका कहना है कि ऐसे छोटे-छोटे दुकानदारों को शुरुआत में ही व्यवस्थित तरीके से बसा देना चाहिए जिससे आम लोगों को दिक्कते न हो और शहर भी सुंदर और स्वच्छ दिखे.






