Saraikela (संजीव मेहता) : आदित्यपुर का नरक द्वार इन दिनों थाना रोड बना हुआ है. चूंकि इस थाना रोड से होकर ही राहगीर आदित्यपुर थाना, शहरी अस्पताल, बिजली ऑफिस के ईई और एई जेई आफिस के साथ विभिन्न मंदिर (शीतला मंदिर, हनुमान मंदिर) आदि स्थानों को जाने को मजबूर हैं. इस रोड से गुजरने वाले राहगीर हर रोज इस रोड में बारहों महीने लेट्रिन के बहते पानी से होकर गुजरते हैं वहीं इसके लिए पूर्ण रूप से जवाबदेह नगर निगम मूक दर्शक बना हुआ है.
नगर निगम नालियों का शिलान्यास तो करती है, उद्घाटन भी करती है लेकिन इन नालियों के आउटलेट कहां और किस रास्ते में गिर रहे हैं इसकी पड़ताल नहीं करवाते हैं. शर्म की बात तो यह है कि जब नगर निगम के सबसे व्यस्ततम मुख्य मार्ग का यह हाल बना हुआ है तो बस्तियों के बहते नालियों का हासिल न जाने किस परिस्थिति में होगा. नगर निगम के अधिकारी और जवाबदेह लोग शिलान्यास और उद्घाटन इसलिए करते हैं उन्हें इसमे फिक्स कमीशन मिलता है न कि नागरिक सुविधाएं की भावना उनके हृदय में है.

बता दें कि रोज रोज नारकीय जीवन जी रहे इस रोड के दुकानदारों से जब इस बाबत पूछा गया तो उनके मुंह से इतनी भद्दी गालियां और नगर निगम के अधिकारियों के लिए बद्दुआएं निकली हैं. जिसका हम अपने समाचार में उल्लेख नहीं कर सकते चूंकि उनकी भाषाएं काफी अमर्यादित थी. जो इस बात को इंगित करता है कि कितना आक्रोश उनके मन नगर निगम के अधिकारियों, मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों के प्रति भरा है. और क्यों न हो जिस दुकानदार से प्रति माह सुविधा टैक्स के रूप में निगम के कर्मी सैंकड़ों रुपये वसूलते हैं लेकिन बदले में उन्हें स्वच्छ वातावरण न देकर नारकीय जीवन दे तो कोई भी व्यक्ति अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करेगा ही.





