दिल्ली मीना देवी: चौकीय नहीं जनाब यह कटु और कड़वी सच्चाई है। सत्य का सामना करें ,रिश्ते निभाए , लेकिन उम्मीद नहीं पाले, वरना सुकून छिन जाएगा ।यह कहावत ही नहीं हकीकत भी है। जैसे दर्पण में हमें अपना चेहरा दिखता है, पर वो असली नहीं, सिर्फ प्रतिबिंब होता है। ठीक वैसे ही जैसे दुनिया में जो सुख-सुविधा, हंसी-खुशी हमें बाहर से दिखाई देती है, वो अक्सर सिर्फ दिखावा होती है। असली खुशी और सुकून अंदर से आता है, बाहर से नहीं। लोग सोशल मीडिया पर, समाज में, रिश्तों में अक्सर खुश होने का दिखावा करते हैं, जबकि अंदर से परेशान रहते हैं। इसलिए इस दिखावे को सच मानकर , खुश होना,धोखा के शिवाय कुछ भी नहीं है ।
वही रिश्तों को लेकर बहुत व्यावहारिक सलाह मिलता है: सबसे प्यार से पेश आओ, रिश्ते बनाकर रखो, सबका सम्मान करो। रिश्ते ही जीवन की पूंजी हैं। लेकिन एक गलती कभी मत करना — किसी से ज्यादा उम्मीद मत रखना, वरना उम्मीदें टूटती है तो सारी शकुन छीन लेती है

क्योंकि जब हम उम्मीद रखते हैं और वो पूरी नहीं होती, तो सबसे ज्यादा दुःख हमें ही होता है। उम्मीदें रिश्तों में दरार लाती हैं। इसलिए कर्म करो, प्रेम दो, रिश्ते निभाओ, पर बदले में कुछ मिलने की अपेक्षा, उम्मीद मत रखे, वरना रिश्ते में दरारें आ जाया करती है। सिर्फ नेकी कर दरिया में डाल, यानी — “कर्म करो, फल की चिंता मत करो”। यही सुखी जीवन का मंत्र है। एक बात हमेशा याद रखिए, दर्पण में मुख्य और दुनिया में सुख होता ही नहीं है, सिर्फ दिखाई देता है इसलिए कहा जाता हैं , रिश्ते सबसे बनाए लेकिन उम्मीद किसी से मत करना वरना उम्मीदें टूटती है, तो बने बनाए रिश्ते भी टूट जाया करते हैं।




