जमशेदपुर : जमशेदपुर में इन दिनों 20 इंच की ‘मिनी’ गायों की जोड़ी ‘गौरी’ और ‘गोपाल’ लोगों के बीच खास चर्चा का विषय बनी हुई है। यह केवल आकर्षण का केंद्र ही नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली और पशुपालन के नए ट्रेंड का भी प्रतीक बनकर उभर रही है। आंध्र प्रदेश से लाई गई पुंगनूर नस्ल की ये गायें अपने छोटे कद के कारण शहरी क्षेत्रों के लिए बेहद उपयुक्त मानी जा रही हैं।
केबुला टाउन निवासी मोहित गुप्ता की इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि अब सीमित जगह में भी पशुपालन संभव है। जहां पारंपरिक गायों के पालन के लिए अधिक जगह और चारे की जरूरत होती है, वहीं पुंगनूर नस्ल कम संसाधनों में भी आसानी से पाली जा सकती है। यही वजह है कि शहरों में रहने वाले लोग अब छोटे स्तर पर डेयरी मॉडल अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस नस्ल की गायें आकार में भले ही छोटी होती हैं, लेकिन इनके दूध की गुणवत्ता काफी बेहतर होती है।

हालांकि दूध उत्पादन कम होता है, फिर भी पौष्टिकता के कारण इसकी अलग पहचान बनी हुई है। इस पहल से न सिर्फ लोगों में उत्सुकता बढ़ी है, बल्कि युवाओं को स्वरोजगार के नए विकल्पों की ओर भी प्रेरणा मिल रही है। अब लोग बड़े डेयरी फार्म के बजाय छोटे और टिकाऊ पशुपालन मॉडल को अपनाने पर विचार कर रहे हैं। कुल मिलाकर, ‘गौरी-गोपाल’ की यह पहल शहरों में पशुपालन के बदलते स्वरूप और भविष्य की दिशा को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।




