रांची : झारखंड उच्च न्यायालय ने बोकारो में एक युवती के लापता होने के मामले में पुलिस की धीमी कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है। गुरुवार को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि इतने समय बाद भी युवती का पता क्यों नहीं चल पाया। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि यदि प्रगति संतोषजनक नहीं रही तो जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जा सकती है।
यह मामला जुलाई 2025 से जुड़ा है, जब एक युवती अचानक गायब हो गई थी। परिजनों द्वारा स्थानीय थाने में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। इससे निराश होकर युवती की मां ने अदालत की शरण ली और पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया।

सुनवाई के दौरान बोकारो के पुलिस अधीक्षक वर्चुअल माध्यम से उपस्थित हुए और जांच की स्थिति बताई। उन्होंने कहा कि प्रयास जारी हैं, लेकिन अदालत उनकी दलीलों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखी। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले ठोस प्रगति दिखाई जाए। इस प्रकरण ने राज्य में गुमशुदगी से जुड़े मामलों की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




