रांची : झारखंड की राजधानी रांची सहित राज्य के विभिन्न जिलों में हाल के दिनों में हुई हत्याओं की घटनाओं ने जनता के मन में भय और असुरक्षा की भावना को गहरा कर दिया है। राज्य में बढ़ते अपराध और गिरती कानून-व्यवस्था ने न केवल प्रशासन की कार्यक्षमता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि राज्य के नागरिकों को अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताओं में डाल दिया है। राज्य की राजधानी रांची नामकुम में रिंग रोड पर रविवार को जमीन कारोबारी मधु राय उर्फ लाल मधुसूदन राय को जहां अपराधियों ने दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया। वहीं सरायकेला खरसावां जिले के मुखिया पार्वती सरदार के पति सोनू सरदार को गोलियों से छलनी कर दिया है। पिछले एक माह में रांची समेत राज्य के कई जिलों में हत्याओं की घटनाएं सामने आई हैं, जो अपराधियों के बेखौफ रवैये को दर्शाती हैं। पिछले कुछ दिनों में घटित घटनाएं जहां प्रशासनिक अधिकारियों की माथे पर बल दिया है। वहीं आम जनता के माथे पर सुरक्षा को लेकर चिंता की लकीरें बढ़ा दी है। राजधानी में एक व्यवसायी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद से व्यवसायियों में गहरी नाराजगी और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। धनबाद : यहां एक पुलिस अधिकारी की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी। यह घटना न केवल प्रशासन के लिए चुनौती है, बल्कि यह पुलिस बल के मनोबल को भी प्रभावित करती है। हजारीबाग : एक प्रतिष्ठित कारोबारी की हत्या से व्यापारिक वर्ग में डर और निराशा का माहौल है। जमशेदपुर, सरायकेला खरसावां, में एक व्यक्ति की निर्मम हत्या ने आम नागरिकों में गुस्सा और भय पैदा कर दिया। पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। गिरिडीह : यहां एक स्थानीय नेता की हत्या ने जनता की चिंता बढ़ा दी है।

राज्य में लगातार हो रही इन घटनाओं ने न केवल जनता को असुरक्षित महसूस कराया है, बल्कि उनके मन में प्रशासन और पुलिस व्यवस्था के प्रति अविश्वास भी पैदा किया है। खासकर, दिनदहाड़े हो रहे अपराध इस बात का संकेत देते हैं कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और कानून-व्यवस्था कमजोर हो चुकी है। राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को इन हत्याओं की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई कर अपराधियों पर लगाम लगाना चाहिए। साथ ही, पुलिसिंग व्यवस्था को मजबूत कर सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाई जाए। इसके अलावा, जनता के विश्वास को बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है। इससे न केवल अपराधों में कमी आएगी, बल्कि नागरिकों में सुरक्षा की भावना भी प्रबल होगी। जिससे राज्य की जनता अपने आप को सुरक्षित महसूस करें। अन्यथा इसी तरह अपराधियों के हौसले बुलंद रहे ,तो, जनता अपने आप को बेचारी और असहज, असुरक्षित महसूस करने लगेगी।




