रांची : झारखंड के लाल हवेली में कैद होकर भी अपराधी बाहर में बड़े अपराध को अंजाम दे रहे हैं । लाल हवेली के कैद में रहकर भी पुलिस प्रशासन के लिए सर दर्द बने हुए हैं। जहां आए दिन नए-नए तरीके से जेल के कैद में रहकर भी बाहर में घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। जो पुलिस प्रशासन के लिए एक गंभीर चुनौती बने हुए हैं। झारखंड के कुछ बड़े अपराधी, जो जेल में रहते हुए भी अपना आतंक फैलाते रहे हैं, जो राज्य के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुके हैं।

1.**अमन साहू** इस लिस्ट में सबसे ऊपर आता है। रांची के बुढ़मू थाना क्षेत्र का रहने वाला यह गैंगस्टर पिछले ढाई साल से जेल में है। इसके बावजूद वह जेल से ही अपने गिरोह की गतिविधियों को संचालित करता रहा है। अमन साहू का गिरोह झारखंड ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी सक्रिय है, और इसका नेटवर्क लॉरेंस बिश्नोई जैसे कुख्यात अपराधियों से भी जुड़ा हुआ है।
2.**विकास तिवारी** दूसरा बड़ा नाम है, जो हजारीबाग जेल में बंद है। पांडेय गिरोह का यह प्रमुख सदस्य भी जेल में रहते हुए अपने गैंग को संचालित करता है। इस पर गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव की हत्या का आरोप है और इसका नेटवर्क झारखंड के रामगढ़ जिले में काफी सक्रिय है।
3.**अमन श्रीवास्तव** श्रीवास्तव गैंग का प्रमुख है, जिसने झारखंड और महाराष्ट्र में अपना आतंक फैलाया है। उसके खिलाफ हत्या, लूट, रंगदारी और अपहरण जैसे गंभीर आरोप हैं। अमन का अपराध की दुनिया में प्रवेश अपने पिता सुशील श्रीवास्तव की हत्या के बाद हुआ, जिसके बाद उसने कई अपराधों को अंजाम दिया।
4.**सुजीत सिन्हा** पलामू का एक और बड़ा अपराधी है, जो हजारीबाग जेल में बंद है। इसने रांची के कुख्यात अपराधी अमन साहू के साथ मिलकर अपराध की दुनिया में अपनी पहचान बनाई। सुजीत का गैंग अभी भी सक्रिय है, और इसकी गतिविधियों को उसकी पत्नी रिया सिन्हा बाहर से संचालित करती है।
5.**अखिलेश सिंह** झारखंड के जमशेदपुर का कुख्यात गैंगस्टर है, जो पढ़े-लिखे परिवार से होने के बावजूद अपराध की दुनिया में उतर गया। इस पर कई हत्याओं और धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। अखिलेश का आतंक जमशेदपुर में इतना फैला हुआ है कि आज भी उसके नाम से लोग कांपते हैं।
इन अपराधियों ने झारखंड की छवि को धूमिल किया है, और उनका आतंक राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।




