रांची : सियासत के दहलीज और पैंतरेबाजी के पगडंडी पर बढ़ते रफ्तार में ,कब कहां ब्रेक लग जाए, कहा नहीं जा सकता, और झारखंड की राजनीति तो पानी की बुलबुले की तरह हो गई है। सियासत के पैंतरेबाजी के राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने जिस तरह से कदम आगे बढ़ाया है। वह झारखंड के राजनीति को एक बार चौंका दिया है । सियासत के राजनीति में बढ़ते कदम सियासत की दो धारी तलवार है, जिसकी जद में कोई भी किधर से भी आ सकता है . यहां मिले सियासी जख्म कभी नहीं सूखते, बल्कि रह -रह कर ये दर्द उभर आता हैं. राजनीति सिर्फ सत्ता की होती हैं, यहां कोई सगा अपना और पराया नहीं होता। इसकी करवटें और उठा -पटक की लपटे ही असली चेहरे और रंग होती है, और बदलती रहती है. जिस तरह झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने झारखंड की राजनीति में एक कौतूहल ला दिया है। उससे झारखंड की राजनीति एक बार फिर दिल्ली की राजनीतिक गलियारों के सुर्खियों में है।
इन दिनों झारखंड की राजनीति उठा पटक और पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के बागी होने की पटकथा ने, झारखंड की राजनीति में हिलोरे लेने लगी है। बागी हुए बगावत किए और अभी तक इस्तीफा नहीं दिए, जाने से पूरे राज्य में चर्चा का विषय बने हुए है।
बदलते झारखंड की राजनीति को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं राजनीतिक प्रशासनिक गलियारों सहित चौक चौराहों पर चल रही है। चंपाई सोरेन ने नई पार्टी के ऐलान कर, सोचा था कि झामुमो पार्टी की नींद उड़ा देंगे। लेकिन आज वे खुद फंस कर रह गए हैं।
ना तो पद उनसे छूट पा रहा है और ना ही पार्टी। झामुमो ने जिस तरह से चंपाई सोरेन के मुद्दे पर चुप्पी साधी है, उससे भी चंपाई सोरेन की चिंताए बढ़ रही है। जो अब चारों तरफ चर्चाएं हो रही है ,कि बागी हुए बगावत किए तो, आखिर अब इस्तीफा क्यों नहीं दे रहे हैं।?
दरअसल चंपाई सोरेन ने जिस तल्खी के साथ नयी पार्टी बनाने की घोषणा की , उससे उन्हें लगा था कि झारखंड मुक्ति मोर्चा में खलबली मचेगी, उनके मान मनौव्वल का दौर शुरू हो जायेगा, लेकिन ऐसा कहीं कुछ होता दिख नहीं रहा है। झामुमो ने भी चंपाई सोरेन के मुद्दे पर एक लंबी लकीर खींच ली, जाहिर है, ये चंपाई सोरेन को उनकी हैसियत बताने के लिए तो काफी है ही, ये संदेश भी JMM देने की कोशिश कर रही है, कि पार्टी में उनके रहने और नहीं रहने से कोई असर नहीं होने वाले वाला है।
इधर चंपाई सोरेन ने जिस अंदाज में कदम बढ़ाया है, जाहिर है अब उनका कदम पीछे खींचना भी मुश्किल ही नही, ना मुमकिन है। चंपाई सोरेन के करीबी लोगों का कहना है कि JMM के दिग्गज नेता बागी बन गए हैं, लेकिन वह अपने नए गुट के लिए JMM को नहीं तोड़ पा रहे हैं। हालांकि, सूत्रों के अनुसार जेएमएम के कुछ नेता चंपाई सोरेन के संपर्क में हैं और बागी विधायक चमरा लिंडा जैसे नेता नए गुट का हिस्सा बन सकते हैं।
चंपई सोरेन ने जब दिल्ली की राह पकड़ी थी तो उनके साथ कम से कम चार से छ: विधायकों के रहने की संभावना जताई गई थी।लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि अभी कोई विधायक उनका साथ देने को आगे नहीं आ रहा है। हालांकि, राजनीति में कुछ भी असंभव नही है। क्यो की राजनीति में कोई किसी का दोस्त, और दुश्मन नहीं होता है । फिलहाल, चंपई सोरेन अपने प्रभाव वाले इलाकों में लगातार जनसभाएं और बैठकें कर रहे हैं। उन्हें देखने-सुनने भारी भीड़ भी जुट रही है, जिससे चंपई सोरेन के रणनीतिकार भी उत्साहित हैं। लेकिन अब यह चर्चाएं खूब जोरों पर चल रही है, कि बागी हुए बगावत किए, तो इस्तीफा क्यों नहीं दे रहे हैं।




