रांची : झारखंड में रेत की कमी को समाप्त करने के लिए खनन विभाग की पहल अब प्रभावी होती दिखाई दे रही है। राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित 19 रेत खदानों की पट्टा प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। संबंधित एजेंसियों द्वारा निर्धारित बोली राशि का आधा भाग जमा करते ही इन स्थलों से खनन और आपूर्ति का कार्य शुरू हो जाएगा। इससे भवन निर्माण, सड़क परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों को गति मिलने की संभावना है।
जिला प्रशासन के स्तर पर औपचारिकताएं पूरी होने के बाद संचालन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। विभिन्न जिलों से निकाली जाने वाली रेत को सुरक्षित भंडारण केंद्रों में रखा जाएगा ताकि मांग के अनुसार समय पर उपलब्ध कराया जा सके। इस व्यवस्था से आपूर्ति श्रृंखला अधिक व्यवस्थित और स्थिर बनेगी। राज्य में 13 भंडारण केंद्र विकसित किए गए हैं, जिन्हें पर्यावरण संबंधी आवश्यक स्वीकृतियां भी प्राप्त हो चुकी हैं।

इन केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में रेत संग्रहित की जाएगी, जिससे भविष्य में जरूरत पड़ने पर तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि पर्यावरणीय नियमों या न्यायिक निर्देशों के कारण खनन गतिविधियां अस्थायी रूप से रुकने पर भी बाजार में वैध रेत की आपूर्ति जारी रहेगी। इससे कृत्रिम कमी पैदा करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा और कीमतों में अनियंत्रित वृद्धि की संभावना भी कम होगी। कुल मिलाकर यह पहल निर्माण क्षेत्र और आम उपभोक्ताओं दोनों के लिए राहतकारी साबित हो सकती है।




