रांची : झारखंड में मातृ एवं शिशु पोषण व्यवस्था एक बार फिर प्रशासनिक सुस्ती की भेंट चढ़ गई है। राज्य के 24 में से 17 जिलों में कुपोषण की चुनौती पहले से ही गंभीर बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं तथा छह माह से तीन वर्ष तक की आयु के लगभग 13 लाख बच्चों को लगातार तीन महीने से निर्धारित पोषण सामग्री नहीं मिल सकी है।
अप्रैल, मई और जून के दौरान लाभार्थी इस सुविधा से वंचित रहे। जानकारी के अनुसार, पोषण सामग्री उपलब्ध कराने वाली तीन संस्थाओं का अनुबंध समाप्त हो चुका है। अनुबंध खत्म होने के बाद सरकार की ओर से न तो नया कार्यादेश जारी किया गया और न ही नई निविदा प्रक्रिया शुरू की गई। परिणामस्वरूप संबंधित संस्थाओं ने वितरण बंद कर दिया है, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से मिलने वाली पोषण सामग्री प्रभावित हुई है।

ऐसी स्थिति पहले भी सामने आ चुकी है। पिछले वर्ष नवंबर और दिसंबर में भी आपूर्ति बाधित हुई थी, तब सरकार ने संबंधित संस्थाओं को अस्थायी रूप से कार्य जारी रखने की अनुमति दी थी। वर्तमान में भी नियमों के अनुसार पुराने आपूर्तिकर्ताओं को अधिकतम तीन-तीन माह के चार चरणों में विस्तार दिया जा सकता है, लेकिन इस बार अब तक ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इससे हजारों परिवारों की पोषण सुरक्षा प्रभावित हो रही है।






