सरायकेला (संजीव मेहता) : झारखंड सरकार की मंशा थी कि इस बार शहरी सरकार ग़ैरदलीय हो, इसी सोच के साथ सरकार ने राज्य के 48 निकायों में गैर दलीय चुनाव कराने की ठानी. इतना ही नहीं कई चुनावों के बाद निकाय चुनाव को बैलेट पेपर के माध्यम से कराने का फैसला भी लिया है. किंतु राज्य की मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने इसे दलीय बना डाला और उनके केंद्रीय से लेकर प्रदेश और स्थानीय स्तर के नेता भी इस तरह से अपने समर्थित प्रत्याशियों के प्रचार प्रसार में जुटे कि मानो अब प्रदेश में उनकी सरकार बनकर ही रहेगी.

अब फैसला जनता के हाथ में है, सोमवार को वोटिंग है जिसके लिए सरकार ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. वहीं इन सबसे इतर पक्ष के दल प्रत्याशी तो अपने समर्थन से खड़े किए लेकिन उनके प्रचार प्रसार में कोई टॉम जहां नहीं दिखाए हैं. इस संबंध में विपक्ष के एक बड़े नेता से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि वे लोग किसी भी चुनाव को हल्के में नहीं लेते हैं, और इसी बहाने वे जमीनी स्तर पर अपने कार्यकर्ताओं के हैसियत को मापने का काम करते हैं.




