जमशेदपुर : वैसे तो मां दुर्गा की प्रतिमा बड़ी और भारी भरकम होने के कारण बड़े वाहनों में निर्माण स्थल से पूजा पंडाल तक लाया जाता है, लेकिन जमशेदपुर का ऐसा पूजा कमिटी जहां मां दुर्गा की प्रतिमा को अपने कंधे में उठा कर लाते है,जी हां ये कमिटी है ओल्ड बारीडीह दुर्गा एवं काली पूजा कमेटी जहां पूर्वजों की पद्धति को आज भी युवा कायम रखे हुए है।
कहा जाता है पुराने काल में मां दुर्गे को पूरे श्रद्धा भाव से आमंत्रण देते हुए प्रतिमा को, डोली के प्रतिरूप में कंधों में उठाकर पूजा स्थल पर स्थापित की जाती थी,समय बीतते गया और पद्धति भी समाप्त हो गया,लेकिन 65 वर्षों से इस आध्यात्मिक पद्धति को युवा की टीम अपने कंधों पर लेकर निभा रहे है। इस वर्ष भी प्रतिमा को लगभग एक किलोमीटर की दूरी से पंडाल लेकर पहुंचे।

कमिटी के उपाध्यक्ष आलोक सिंह ने कहा कि भले ही मां दुर्गा की प्रतिमा बड़ी होती है लेकिन जब अपने कंधों पर लेते है तो तनिक भी भारी नहीं लगता बल्कि शरीर में एक ऊर्जा उत्पन्न हो जाती है जो हम लोगों के लिए सौभाग्य की बात है।उन्होंने बताया कि इस वर्ष दक्षिण भारत के प्रतिष्ठित दुर्गा मंदिर के प्रतिरूप में पंडाल बनाया गया जो रंग बिरंगे विद्युत सज्जा में काफी आकर्षक दिखती है,जिसका उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और भाजपा नेता अमरप्रीत सिंह काले ने फीता काटकर की।



