Saraikela (संजीव मेहता) : पूर्व विधायक और झामुमो के प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी के तीखे सवाल से क्यों बेचैन हो रहे हैं पूर्व मुख्यमंत्री चम्पई ? इन दिनों एक कार्यकर्ता सम्मेलन कुणाल षाड़ंगी के द्वारा दिये गए तीखे बयान के बाद चम्पई सोरेन अपने पार्टी भाजपा के कार्यकर्ताओं से जवाबी बयान तो दिलवा रहे हैं लेकिन खूद षाड़ंगी की तीखी प्रतिक्रिया पर कोई बयान नहीं दे रहे हैं. इस बीच घाटशिला विधानसभा चुनाव का एलान भी हो चुका है, जिसमें चम्पई सोरेन अपने पुत्र बाबूलाल सोरेन के लिए जमीन तलाशने में लगे हैं. ऐसे माहौल में यह बयानबाजी अलग ही गुल खिला रही है.

ताजा बयान कुणाल षाड़ंगी ने अपने फेसबुक अकाउंट पर पोष्ट की है जिससे चुनावी माहौल में राजनीति गरमा गई है. पेश है सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर दिए गए कुणाल षाड़ंगी के बयान का अंश :- “तू इधर उधर की न बात कर, ये बता कि क़ाफ़िला कैसे लुटा ? मुझे रहज़नों से गिला तो है, पर तेरी रहबरी का सवाल है” श्री षाड़ंगी आगे लिखते हैं कि – छुटभैया क़िस्म के, चार पाँच पेड वर्कर और अपना बूथ पर भी कभी अपनी पार्टी को बढ़त न दिलवा पाने वाले और अपने अपने पंचायत में भी अप्रासंगिक हो चुके फूँक हुए कारतूसों से मुझे कितनी भी गाली दिलवा लीजिए और अनर्गल बातें करवा लीजिए सर, लेकिन जिस व्यक्ति के साथ आपका 4.5 दशकों का पारिवारिक व राजनीतिक संबंध रहा, जिसकी तस्वीर आपके घर के दीवार पर लगी होती है और जिसे आप अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं वे (बाबा) अस्पताल में अपने जीवन की अंतिम लड़ाई लड़ते रहे लेकिन तब तक उनका हालचाल लेने या उन्हें देख आने के लिए आप 45 दिनों में 45 मिनट नहीं निकाल सके. निधन के बाद भी एक पल के लिए नेमरा ही चले जाते या उनके परिजनों से कहीं तो मिल लेते. ऐसी क्या राजनीतिक मजबूरी चंपई सोरेन सर ? यह बात भले सार्वजनिक तौर पर आप स्वीकार न करें या मेरे सीधे सवाल का जवाब न दे पाएँ लेकिन आपकी अंतरात्मा आपसे ताउम्र यह प्रश्न पूछेगी.



