रांची : राज्य पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा में प्रोन्नति दिलाने की प्रक्रिया लंबे समय से बाधित है। इसका प्रमुख कारण डीजीपी पद को लेकर राज्य सरकार और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के बीच चल रहा सूत्रों के अनुसार विवाद बताया जा रहा है। राज्य सरकार ने हाल ही में फिर से यूपीएससी से निवेदन किया है कि प्रोन्नति समिति की बैठक या तो अनुराग गुप्ता की अध्यक्षता में की जाए या उनके बिना ही आयोजित की जाए। बैठक की अनिश्चितता के कारण योग्य अफसर प्रमोशन से वंचित हो रहे हैं।
प्रोन्नति की यह प्रक्रिया मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक की उपस्थिति में संपन्न होती है। 13 अगस्त को प्रस्तावित बैठक इस कारण रद्द करनी पड़ी थी कि यूपीएससी ने अनुराग गुप्ता को पुलिस प्रमुख के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया । हालांकि वे केंद्र सरकार की नजर में 30 अप्रैल से सेवानिवृत्त माने जा चुके हैं, राज्य सरकार ने उन्हें सेवा विस्तार दे रखा है। लेकिन यह विस्तार केंद्र सरकार के अनुसार वैधानिक नहीं है। यूपीएससी ने भी इसे अस्वीकार्य कर दिया है।

इस बीच, डीएसपी संवर्ग के 17 वरिष्ठ अफसरों की प्रोन्नति संबंधी फाइलें विचाराधीन हैं। इनमें शिवेंद्र, राधा प्रेम किशोर, मुकेश कुमार महतो, दीपक कुमार-1, मजरूल होदा, राजेश कुमार, अविनाश कुमार, रौशन गुड़िया समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं। इन सभी को रिक्त पदों पर नियुक्त करने की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है। सरकार ने आयोग से आग्रह किया है कि वह जल्द से जल्द नई तिथि तय करे, ताकि योग्य अधिकारियों को उनका हक मिल सके। फिलहाल यह मामला राज्य और केंद्र के बीच नियमों की व्याख्या और अधिकार क्षेत्र की टकराहट का प्रतीक बन गया है।




