रांची : भारत की संस्कृति और परंपराओं में त्योहारों का विशेष महत्व है। इन्हीं में से एक है *विश्वकर्मा पूजा*, जिसे हर वर्ष भाद्रपद मास के कनीयाम या अश्विन मास के प्रारंभिक दिनों में बड़े श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। भगवान विश्वकर्मा को देव शिल्पी, सृजनकर्ता और निर्माण कला के आद्य प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है।
कहा जाता है कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड, देवी-देवताओं के महल, दिव्य अस्त्र-शस्त्र तथा प्रसिद्ध नगर उनके ही हाथों से निर्मित हुए हैं। इस दिन कारखानों, उद्योगों, कार्यालयों, निर्माण स्थलों और यहां तक कि घरों में भी भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। लोग अपने उपकरणों, औजारों, मशीनों और वाहनों की सफाई कर उन्हें सजाते हैं और पूजन-अर्चन के बाद उनसे कार्य आरंभ करते हैं। यह विश्वास है कि पूजा करने से कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है और साधनों का सही उपयोग होता है।

विश्वकर्मा पूजा केवल श्रद्धा का प्रतीक नहीं है बल्कि यह हमें परिश्रम, सृजन और कर्मनिष्ठा का संदेश भी देती है। यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि हर व्यक्ति अपने कार्यक्षेत्र में भगवान विश्वकर्मा के समान समर्पित होकर ईमानदारी से प्रयास करे, तभी सच्ची उन्नति संभव है। आज के दिन हम यह कामना करते हैं कि भगवान विश्वकर्मा सभी को कुशलता, रचनात्मकता और सफलता प्रदान करें। उनके आशीर्वाद से हर व्यक्ति का जीवन सुख, समृद्धि और प्रगति से भर जाए।




