रांची : झारखंड में सुरक्षा, यातायात नियंत्रण, चुनावी दायित्व और अस्पतालों की व्यवस्था संभालने वाले होमगार्ड कर्मियों की आर्थिक स्थिति गंभीर संकट में पहुंच गई है। राज्य के अलग-अलग सरकारी विभागों में तैनात हजारों जवानों को लंबे समय से भुगतान नहीं मिला है। सबसे अधिक परेशानी स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत लगभग तीन हजार कर्मियों को हो रही है, जहां कई लोगों को पांच महीने से लेकर सोलह महीने तक राशि नहीं मिली।
अन्य विभागों में कार्यरत सैकड़ों जवान भी कई महीनों से बकाया भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। निकाय चुनाव तथा रामनवमी और मुहर्रम जैसी संवेदनशील ड्यूटी में लगाए गए करीब दस हजार कर्मियों को भी अभी तक पारिश्रमिक नहीं दिया गया है। आर्थिक तंगी का असर अब परिवारों पर साफ दिखाई देने लगा है। दुमका में कार्यरत जवान जितेंद्र कुमार ने बताया कि लगातार ड्यूटी के बावजूद घर चलाना मुश्किल हो गया है। राशन दुकानदारों ने उधार देना बंद कर दिया है और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं सदर अस्पताल में तैनात दिनेश हांसदा पिछले सोलह महीने से भुगतान नहीं मिलने के कारण रिश्तेदारों से कर्ज लेकर घर चला रहे हैं।

बीमार माता-पिता के इलाज के लिए भी उनके पास पर्याप्त साधन नहीं हैं। जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में तैनात महिला जवान फूल कुमारी की भावुक प्रतिक्रिया ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। ड्यूटी के दौरान रोते हुए उन्होंने भुगतान नहीं होने पर आत्मघाती कदम उठाने की चेतावनी दी, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने 65.21 करोड़ रुपये जारी करने की प्रक्रिया शुरू की। इस मुद्दे पर प्रशासन और होमगार्ड संगठन के बीच मतभेद भी सामने आए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बकाया भुगतान केवल एमजीएम अस्पताल से जुड़ा मामला है, जबकि संगठन का दावा है कि राज्य के कई विभागों में जवानों को नियमित भुगतान नहीं मिल रहा। संगठन ने शीघ्र समाधान नहीं होने पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी है।






