रांची : राज्य के क्रमशः सभी जिले में नशे के कारोबार पूरी तरह लगभग फैल चुका है। लगातार पुलिस की कामयाबी भी मिल रही है, परंतु धंधा बंद नहीं हो रहा है। कोल्हान क्षेत्र में नशे के खिलाफ पुलिस की लगातार कार्रवाई के दावे सुनाई देते हैं। लगभग रोज़ाना किसी न किसी ड्रग्स पेडलर की गिरफ्तारी और ब्राउन शुगर की बरामदगी की खबरें सामने आती हैं। परंतु धंधा बंद नहीं होता आखिर क्यों? आदित्यपुर और जमशेदपुर पुलिस ने सैकड़ों कथित ड्रग्स पेडलरों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। इसके बावजूद सबसे बड़ा सवाल आज भी अनुत्तरित है — यदि कार्रवाई इतनी प्रभावी है तो नशे का कारोबार आखिर खत्म क्यों नहीं हो रहा?
यह स्थिति स्पष्ट संकेत देती है कि पुलिस की कार्रवाई अभी मुख्यतः निचले स्तर तक ही सीमित है। जिन युवकों को गिरफ्तार किया जाता है, वे अधिकतर छोटे पेडलर या सप्लाई चेन की छोटे कड़ी होते हैं। लेकिन इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने वाले बड़े सौदागर कौन हैं, वे कहां हैं और उन तक पुलिस क्यों नहीं पहुंच पा रही है? यह प्रश्न आम जनता के मन में लगातार उठ रहा है। पुलिस अगर इतनी बड़े पैमाने पर कार्रवाई करती है तो आखिर धंधा क्यों नहीं बंद होता है! आदित्यपुर के कुछ इलाकों, विशेषकर मुस्लिम बस्ती के एच रोड, का नाम बार-बार ब्राउन शुगर की बरामदगी के मामलों में सामने आता रहा है।

यदि किसी स्थान से लगातार गिरफ्तारियां हो रही हैं, तो स्वाभाविक रूप से यह अपेक्षा भी बनती है कि वहां सक्रिय पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो। केवल पेडलरों को पकड़ लेने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। जब तक सप्लाई चेन के सरगनाओं तक कानून का शिकंजा नहीं पहुंचेगा, तब तक नए पेडलर तैयार होते रहेंगे और यह कारोबार चलता रहेगा। चिंता की बात यह भी है कि यह नशा अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रहा। इसकी पहुंच कोल्हान प्रमंडल के तीनों जिलों—पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और पश्चिमी सिंहभूम—के ग्रामीण इलाकों तक फैल चुकी है। इसका सबसे बड़ा दुष्परिणाम युवाओं पर पड़ रहा है।
नशे की लत उन्हें अपराध की ओर धकेल रही है, जिससे चोरी, छिनतई और अन्य आपराधिक घटनाओं में वृद्धि देखने को मिल रही है। जनता चाहती है कि पुलिस केवल गिरफ्तारी के आंकड़े प्रस्तुत करने तक सीमित न रहे, बल्कि इस अवैध कारोबार की जड़ों तक पहुंचे। बड़े तस्करों, वित्तीय नेटवर्क और सप्लाई चैन को ध्वस्त करने के लिए ठोस, पारदर्शी और परिणामोन्मुख कार्रवाई आवश्यक रूप से हो। नशे के खिलाफ लड़ाई तभी सफल होगी, जब छोटे पेडलरों के साथ-साथ पूरे गिरोह का भी सफाया होगा। यही आज जनता की सबसे बड़ी उम्मीदें और अपेक्षाएं है। देखना अब यह है कि केवल धंधे बाजो पर ही कार्रवाई होती है, या आने वाले वक्त में धंधा भी बंद होता हैं। जो सभी के सवालों के घेरे में और कटघरे में सवाल बनकर मुंह बाए खड़ा हैं।






