बिहार : बिहार सरकार ने भूमि निबंधन व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए राज्यभर में जमीन के न्यूनतम सरकारी मूल्य में संशोधन लागू कर दिया है। नई अधिसूचना के अनुसार शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की भूमि दरों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। सरकार का मानना है कि इससे जमीन के वास्तविक मूल्य और सरकारी मूल्यांकन के बीच का अंतर कम होगा तथा संपत्ति लेनदेन अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनेंगे। नई व्यवस्था के तहत नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में भूमि मूल्य में काफी बढ़ोतरी की गई है, जबकि ग्रामीण इलाकों में भी दरों को बढ़ाया गया है।
इसके कारण जमीन की खरीद-बिक्री कराने वाले लोगों को अब पहले की अपेक्षा अधिक स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क देना पड़ सकता है, क्योंकि शुल्क की गणना संशोधित सरकारी दरों के आधार पर होगी। भूमि पंजीकरण प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए ई-निबंधन प्रणाली को भी मजबूत किया गया है। अब रजिस्ट्री से पहले भूमि से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां ऑनलाइन दर्ज करनी होंगी। आवेदन संबंधित अंचल कार्यालय में सत्यापन के लिए भेजा जाएगा और निर्धारित समय के भीतर जांच पूरी की जाएगी। इससे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर होने वाले लेनदेन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

सरकार ने संपत्ति हस्तांतरण और दान-पत्र के मामलों में भी नई शुल्क व्यवस्था लागू की है। महिला के नाम संपत्ति हस्तांतरण पर रियायती दर का प्रावधान रखा गया है, जबकि अन्य मामलों में सामान्य शुल्क लागू रहेगा। इस निर्णय से किसानों और भूमि स्वामियों को भी लाभ मिलने की संभावना है। भविष्य में किसी सरकारी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण होने पर बढ़े हुए सरकारी मूल्य के आधार पर अधिक मुआवजा मिल सकेगा। साथ ही बैंक भी भूमि के बेहतर मूल्यांकन के आधार पर ऋण स्वीकृत करने में सक्षम होंगे। राज्य सरकार का उद्देश्य भूमि कारोबार में पारदर्शिता बढ़ाना, राजस्व संग्रह को मजबूत करना, कर चोरी पर नियंत्रण लगाना तथा नागरिकों को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद निबंधन व्यवस्था उपलब्ध कराना है।






