दिल्ली : कैंसर के उपचार क्षेत्र में अब व्यक्तिगत चिकित्सा की अवधारणा तेजी से उभर रही है। पहले अधिकांश रोगियों को समान प्रकार की दवाएं और पारंपरिक उपचार दिए जाते थे, लेकिन अब विशेषज्ञ प्रत्येक व्यक्ति की आनुवंशिक संरचना का अध्ययन कर उपचार योजना तैयार कर रहे हैं। इस दिशा में नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
यह उन्नत परीक्षण शरीर के नमूनों जैसे रक्त, लार, ऊतक अथवा अन्य जैविक सामग्री के आधार पर किया जाता है। इसकी मदद से वैज्ञानिक डीएनए में मौजूद सूक्ष्म आनुवंशिक परिवर्तनों का विस्तृत विश्लेषण कर पाते हैं। इससे यह समझने में सहायता मिलती है कि बीमारी किस कारण विकसित हुई, भविष्य में उससे जुड़े खतरे क्या हो सकते हैं और कौन-सी दवा अधिक प्रभावी सिद्ध होगी।

इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि उपचार अधिक सटीक और लक्षित बन जाता है। इससे अनावश्यक दवाओं के उपयोग की संभावना घटती है तथा रोगी को गंभीर दुष्प्रभावों से भी काफी हद तक राहत मिल सकती है। चिकित्सकों को भी निर्णय लेने में अधिक वैज्ञानिक आधार प्राप्त होता है।हालांकि, यह जांच अभी अपेक्षाकृत महंगी है। इसकी लागत लगभग 20 हजार रुपये से लेकर 4 लाख रुपये तक हो सकती है, जो जांच के प्रकार और दायरे पर निर्भर करती है।






