रांची : झारखंड में मानसूनी गतिविधियों के तेज होने के साथ वज्रपात की घटनाओं में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। बीते 24 घंटों के दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हुए बिजली गिरने के हादसों ने आठ लोगों की जान ले ली, जबकि कई अन्य घायल हो गए। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, जिससे प्रभावित परिवारों में शोक और भय का माहौल है। जानकारी के अनुसार, रांची और गढ़वा जिलों में दो-दो लोगों की मृत्यु हुई, जबकि चतरा, गिरिडीह, सरायकेला-खरसावां और जामताड़ा में एक-एक व्यक्ति इस प्राकृतिक आपदा का शिकार बना।
अधिकांश घटनाएं उस समय हुईं जब लोग खेती, पशुपालन या अन्य दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। रांची के पिठोरिया क्षेत्र में कृषि कार्य के दौरान दो व्यक्तियों पर अचानक गाज गिर गई, जिससे उनकी मौके पर ही जान चली गई। गढ़वा में एक महिला वर्षा से बचने के लिए पेड़ की आड़ में खड़ी थी, वहीं एक बुजुर्ग पशु चराने गए थे। दोनों इस दुर्घटना का शिकार बन गए। गिरिडीह में एक दस वर्षीय बालक गंभीर रूप से झुलस गया था। अस्पताल में इलाज के दौरान उसने अंतिम सांस ली।

चतरा में कार्यस्थल पर मौजूद एक महिला श्रमिक और सरायकेला-खरसावां में एक ग्रामीण की भी इसी कारण मृत्यु हो गई। सरायकेला की घटना में मृतक के परिवार के दो सदस्य घायल हुए हैं और उनका उपचार जारी है। मौसम विशेषज्ञों ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने का आग्रह किया है। गरज-चमक के दौरान खुले क्षेत्रों में रुकने, ऊंची जगहों पर जाने या पेड़ों की छाया लेने से बचना चाहिए। सुरक्षित भवन में शरण लेना सबसे बेहतर उपाय माना गया है। प्रशासन ने नागरिकों से मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखने और आवश्यक सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है। थोड़ी सतर्कता और समय पर सावधानी बरतकर ऐसे दुखद हादसों से काफी हद तक बचा जा सकता है।





