रांची : पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची से जुड़ा मामला अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है। इस प्रकरण की सुनवाई आज सुप्रीम कोर्ट में निर्धारित है, जिसके चलते राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। खास बात यह है कि इस सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के स्वयं न्यायालय में उपस्थित होकर पक्ष रखने की संभावना जताई जा रही है, जो इस मामले को और भी अहम बना देती है।
तृणमूल कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री इस बार केवल एक राजनीतिक नेता के रूप में नहीं, बल्कि एक कानून की समझ रखने वाली व्यक्ति के तौर पर सामने आ सकती हैं। मतदाता सूची में किए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के समय वे स्वयं अपनी दलीलें रख सकती हैं। पार्टी का मानना है कि यह विषय लोकतांत्रिक ढांचे से जुड़ा हुआ है और इसे सीधे न्यायाधीशों के समक्ष रखना आवश्यक है।

इस विवाद पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ विचार करेगी, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली भी शामिल हैं। इसके अलावा टीएमसी के सांसद डेरेक ओ ब्रायन, डोला सेन और मोस्तारी बानो ने भी इसी मुद्दे पर अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं, जिन पर एक साथ सुनवाई होगी। चुनाव से पहले उठे इस विवाद ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल कानूनी दृष्टि से, बल्कि राजनीतिक दिशा तय करने के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



