रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का आज चौदहवां दिन है, जिसमें गढ़वा के विधायक सत्येंद्र तिवारी ने बिजली वितरण निगम द्वारा ट्रांसफार्मर की मरम्मत और स्थापना में हो रही देरी पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि निगम के पास पर्याप्त ट्रांसफार्मर उपलब्ध नहीं हैं। सत्येंद्र तिवारी ने बताया कि एक ट्रांसफार्मर को लगाने में करीब 30,000 रुपये खर्च होते हैं, और जब किसी गांव का ट्रांसफार्मर खराब हो जाता है, तो ग्रामीण खुद पैसे इकट्ठा कर नया ट्रांसफार्मर खरीदते हैं और उसे बिजली विभाग तक पहुंचाते हैं। फिर ट्रांसफार्मर की मरम्मत कर उसे फिर से लगाने की जिम्मेदारी भी गांववासियों पर होती है।

विधायक ने यह भी बताया कि अगर ग्रामीण इलाकों में 48 घंटे और शहरी इलाकों में 24 घंटे के भीतर बिजली बहाल नहीं होती, तो उपभोक्ताओं को प्रतिदिन 25 रुपये का मुआवजा मिलने का प्रावधान है, लेकिन यह लागू नहीं किया जाता। इस पर प्रभारी मंत्री योगेंद्र प्रताप ने कहा कि यह प्रावधान 2015 में जेएसपीआसी द्वारा तय किया गया था, और अब तक कोई उपभोक्ता इसकी शिकायत नहीं लेकर आया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि 2025-26 तक इसे लागू किया जाएगा, जिसके लिए आईटी सॉफ्टवेयर भी तैयार किया जा चुका है।




