रांची : झारखंड हाईकोर्ट में स्थाई चीफ जस्टिस की नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 11 जुलाई को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव को झारखंड हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की थी, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक उनके स्थानांतरण की अधिसूचना जारी नहीं की है। इस देरी को राज्य सरकार ने न्यायिक प्रशासन के लिए हानिकारक बताया है। राज्य सरकार ने मेमोरेंडम ऑफ प्रोसिजर का हवाला देते हुए कहा है कि कार्यकारी चीफ जस्टिस पर एक महीने से अधिक समय तक जिम्मेदारी नहीं डाली जानी चाहिए। बावजूद इसके, केंद्र द्वारा निर्णय में की जा रही अनुचित देरी न्यायपालिका के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि इस मामले में केंद्र सरकार के खिलाफ अवमानना का मामला चलाया जाए। वर्तमान में झारखंड हाईकोर्ट में जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद एक्टिंग चीफ जस्टिस के तौर पर कार्यरत हैं। वे राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सख्त रुख अपना रहे हैं।

हालांकि, राज्य सरकार का मानना है कि स्थाई चीफ जस्टिस की नियुक्ति जरूरी है, क्योंकि चीफ जस्टिस न्यायिक परिवार के मुखिया होते हैं और उनके नेतृत्व में न्यायपालिका के कामकाज को सुचारू रूप से चलाना संभव होता है। झारखंड सरकार की यह याचिका देश में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच चल रहे संबंधों पर प्रकाश डालती है, जहां एक तरफ न्यायिक स्वतंत्रता की बात होती है, वहीं दूसरी ओर नियुक्तियों में हो रही देरी प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देती है।




