
जमशेदपुर: जमशेदपुर में बिल्डिंग बायलॉज के उलंघन के मामले में सरयू राय ने चिंता जताया है।उन्होंने अक्षेस पर आरोप लगाते हुए कहा की वह पक्षतापूर्ण रवैए अपनाकर उच्च न्यायालय को गलत प्रतिवेदन सौंप रहा है। इसे लेकर विधायक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी देते हुए बताया की जमशेदपुर में झारखंड सरकार के बिल्डिंग बायलाॅज का घोर उल्लंघन होते आ रहा है। जिसके कारण झारखंड हाईकोर्ट ने नक्शा विचलन कर निर्माण हुए भवनों के अवैध भाग को तोड़ने का स्पष्ट निर्देश दिया है।परंतु इस निर्देश का अनुपालन जिला प्रशासन द्वारा और जमशेदपुर अक्षेस द्वारा पक्षपातपूर्ण तरीका से किया जा रहा है।वैसे ऊंची पैरवी के लोग जिनके द्वारा सरकार में बैठे वैसे लोग, जिनमें मंत्री भी शामिल हैं। उनके दरबार में हाजिरी लगाते हैं, उनके नक्शा विचलन की ओर प्रशासन और अक्षेस का ध्यान नहीं जा रहा है। कुछ अवैध निर्माणों को अंशिक रूप से ध्वस्त कर उच्च न्यायालय में गलत प्रतिवेदन सौंपा जा रहा है। उदाहरण के तौर पर साकची ठाकुरबाड़ी रोड के प्लाॅट नं. 52 और 46 पर बने अवैध निर्माण और बाराद्वारी के प्लाॅट नं. 122 पर निर्माणाधीन संरचना की अनदेखी की जा रही है। जबकि उच्च न्यायालय द्वारा गठित टीम की सूची में भी ये संरचनाएं शामिल हैं। साकची में ही ‘साकची फार्मा’ के भवन का जी$2 का नक्शा पारित कर 5 तल्ला निर्माण हो गया है और पार्किंग एरिया भी नहीं है। ‘अपेक्स अस्पताल’ के भवन के निर्माण में भी भारी नक्शा विचलन हुआ है।
बिस्टूपूर में रीगल चौक पर बनी बिल्डिंग जिसमें ‘क्रोमा’ और ‘आॅक्सीजन’ जैसे उपक्रम चल रहे हैं, उनका नक्शा अनियमित होने और अनियमित नक्शा में भी भारी विचलन होने के बावजूद उच्च न्यायालय का आदेश इनपर लागू नहीं हो रहा है। जिन अधिकारियों ने विगत 10 वर्षों में गलत नक्शा पारित किया है। उनपर तो सेक्शन 438 का उपयोग ही नहीं हो रहा है, जिसमें अनियमितता बरतने वालों पर प्राथमिकी दर्ज करने का प्रावधान है।इसमें जमशेदपुर अक्षेस और टाटा स्टील के टाऊन डिवीजन दोनों द्वारा ही नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा की जो सरकारी अधिकारी अनियमितताओं को दूर करना चाहते हैं, उनके ऊपर सरकार में बैठे लोगों का राजनीतिक दबाव दिया जा रहा है। इसे लेकर विधायक ने अधिवक्ता श्री अखिलेश श्रीवास्तव और याचिकाकर्ता श्री राकेश झा से भेंट कर आश्वस्त किया है कि जमशेदपुर में नगरपालिका के दोहरे प्रचलन के चलते आम जनता को हो रहे नुकसान और जनसुविधाओं में आ रही कठिनाइयों के मद्देनजर जनहित में जरूरी हुआ तो वे उच्च न्यायालय में चल रहे प्रासंगिक मामले में हस्तक्षेप करने के लिए तैयार है।






