रांची : झारखंड सरकार ने राज्य में मदिरा उत्पादन इकाइयों की निगरानी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी है। उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने डिस्टिलरी, ब्रेवरी, माइक्रो ब्रेवरी तथा अन्य निर्माण इकाइयों में स्थापित तकनीकी प्रणालियों के संचालन, रखरखाव और निरीक्षण के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस पहल का मकसद उत्पादन प्रक्रिया पर सटीक नियंत्रण स्थापित करना और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर प्रभावी रोक लगाना है।
यह निर्णय हालिया निरीक्षणों के दौरान कई संयंत्रों में माप संबंधी उपकरणों के अपेक्षित स्तर पर कार्य नहीं करने की शिकायतों के बाद लिया गया। विभाग ने सभी जिलों के सहायक आयुक्तों और उत्पाद अधीक्षकों को नई व्यवस्था का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। नए प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक शराब एवं बीयर निर्माण इकाई को अपने यहां स्थापित मापन उपकरण, रडार आधारित स्तर मापक तथा सेंसर युक्त बोतल गणना प्रणाली की जानकारी संबंधित उत्पाद पदाधिकारी को उपलब्ध करानी होगी। इसके साथ लाइसेंसधारी को शपथ पत्र भी जमा करना अनिवार्य रहेगा। संबंधित अधिकारी भौतिक सत्यापन के बाद अपनी रिपोर्ट विभाग को भेजेंगे।

एसओपी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी तकनीकी उपकरणों का वार्षिक अनुरक्षण अनिवार्य होगा। यदि किसी मशीन में खराबी आती है तो उसकी तत्काल लिखित सूचना विभाग को देनी होगी। विभाग की पूर्व स्वीकृति के बिना किसी भी उपकरण को हटाने, बदलने या निष्क्रिय करने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही सभी उपकरणों की सटीकता की जांच हर वर्ष एनएबीएल से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं के माध्यम से करानी होगी। विभाग ने उन सभी निर्माण एवं बॉटलिंग इकाइयों को भी निर्देश दिया है जिन्होंने अब तक अपने संयंत्र का नक्शा और तकनीकी विवरण जमा नहीं किया है। ऐसे प्रतिष्ठानों को भंडारण, किण्वन, बॉटलिंग लाइन सहित पूरे संयंत्र की संरचना का विवरण उपलब्ध कराना होगा, ताकि उत्पादन प्रक्रिया की निगरानी अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सके।





