मथुरा : 28 सारंग विहार, मथुरा स्थित डॉ. दिनेश पाठक ‘शशि’ के आवास पर सरस काव्य गोष्ठी एवं तीन पुस्तकों का लोकार्पण सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अभियोजन अधिकारी अरुण कुमार दुबे रहे। अतिथि डॉ. के. उमराव विवेकनिधि तथा अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार देवी प्रसाद गौड़ ने की। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दिनेश पाठक ‘शशि’ ने किया। गोष्ठी में डॉ. अनुराधा प्रियदर्शिनी ने पिता पर केंद्रित रचना प्रस्तुत की:
_पापा मेरे सरल हृदय के, अद्भुत व्यक्तित्व निराला_
_सख्त नारियल खोल के जैसे, मिश्री मक्खन का निवाला।_
देवी प्रसाद गौड़ ने बुजुर्गों की उपेक्षा पर व्यंग्य दोहे सुनाए:
_बेटी ने कहा, पापा दादी का फोन आया है_
_दवाई को पैसा मंगाया है…_
तथा विदेश बसे बेटों पर कहा:
_पापा जी फूले फिरे, बेटा गया विदेश_
_अर्थी रोई फूटकर, अब तो लौट स्वदेश।_
डॉ. के. उमराव विवेकनिधि ने ‘शरीर विज्ञान शतक’ से रचनाएँ पढ़ीं:
_कफ, वात औ पित्त का, संतुलित रखें विधान_
_मौसम के अनुकूल ही, करें खान और पान।_
मदन मोहन शर्मा ‘अरविन्द’ ने सुनाया:
_सपने मत देखा करो, इनका ओर न छोर_
_दूर बहुत ले जायेंगे, थामे रखना डोर।_

प्राची खण्डेलवाल ने बचत पर कविता पढ़ी:
_हर महीने थोड़ा-थोड़ा, सबको जोड़ना पड़ता है_
_एसआईपी का छोटा सा कदम, भविष्य सुनहरा करता है।_
प्रियंका खण्डेलवाल ने ‘सांप-सीढ़ी’ रचना से अच्छे कर्मों की प्रेरणा दी। श्रीमती शशि पाठक ने गीत व हाइकु प्रस्तुत किए:
_बूंद-बूंद थी, नदी में मिलकर, हुई उदधि।_
बालिका तारिका ने कवि श्री सोहनलाल द्विवेदी जी की कविता _‘लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती’_ सुनाकर वाहवाही लूटी।
डॉ. दिनेश पाठक ‘शशि’ ने हाइकु सुनाए:
_नैनों की कोर, भीगीं तो बोलीं बोल, बिन बोले ही।_
_बेपहचान, अपने ही घर में, आज इंसान।_
काव्य पाठ के बाद डॉ. अनुराधा प्रियदर्शिनी के काव्य संग्रह ‘सारंग राग’, डॉ. के. उमराव विवेकनिधि के ‘शरीर विज्ञान शतक’ एवं मदन मोहन शर्मा ‘अरविन्द’ के कहानी संग्रह ‘अपना-अपना सच’ का लोकार्पण हुआ। देवी प्रसाद गौड़ ने अपनी ब्रजभाषा पुस्तक ‘मन ठाकुर के तुलसी दल’ सभी को भेंट की। कार्यक्रम में नैना, ईशान, माधवी एवं फ्लफी भी उपस्थित रहे।






