Saraikela (संजीव मेहता) : आदित्यपुर में रोज कोई न कोई फीडर 4 से 6 घंटे रखरखाव के नाम पर बंद रखा जा रहा है, लेकिन फिर भी अनियंत्रित रूप से शट डाउन भी किया जाता है, आखिर ये माजरा क्या है ? कहीं इसके पीछे कोई घपला घोटाला तो नहीं. वैसे आप देखेंगे कि आज भी जेएसईबी की बिजली व्यवस्था अपने क्षेत्र के प्रबल प्रतिद्वंद्वी जुस्को पावर से डावांडोल की स्थिति में ही नजर आएगी.

इनके ट्रांसफॉर्मर पर जंगल उगे हुए मिलेंगे, जहां तहां बिजली के तार झूलते नजर आएंगे. आखिर रखरखाव के नाम पर इनके कारिंदे कौन सा कार्य करते हैं. आज भी आधे से अधिक बिजली के लाइन एरियल बंच केबलिंग नहीं हो पाए हैं. ट्रांसफॉर्मर के फ्यूज अगर गलती से रात में उड़ गए तो सुबह 10 बजे के पहले वे दुरुस्त नहीं होते हैं. इतनी सारी फाल्ट होने पर आखिर सवाल उठाना तो लाजिमी है कि रखरखाव के नाम पर आखिर झारखंड बिजली वितरण निगम के अधिकारी कौन सा कार्य करवाते हैं. इनके कर्मचारी आखिर किस बात का नाईट एलाउंस लेते हैं जब रात का फ्यूज दिन में ही बनता है तो ? सवाल तो कई हैं लेकिन उपभोक्ताओं को अब भी जुस्को पावर जैसे क्वालिटी बिजली का इंतजार है, अब तक इनकी बिजली दर भी जुस्को से ज्यादा महंगी हो चुकी है.




