जमशेदपुर : जमशेदपुर स्थित अरका जैन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ ने छात्रों को समकालीन कानूनी कौशल से लैस करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया। जे.ई.एच. ऑडिटोरियम में आयोजित इस सत्र का विषय था, “एप्लाइड स्किल्स इन मेडिएशन एंड नेगोटिएशन टेक्निक्स”। यह सत्र विश्वविद्यालय के वैल्यू एडेड कोर्स का हिस्सा था, जिसमें विद्यार्थियों को मध्यस्थता (Mediation) और वार्ता (Negotiation) के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराया गया।
सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट राजेश दाश ने दी विस्तृत जानकारी
सत्र के मुख्य वक्ता सुप्रीम कोर्ट की मेडिएशन एंड कन्सिलिएशन प्रोजेक्ट कमेटी के वरिष्ठ प्रशिक्षक, एडवोकेट राजेश दाश थे। उन्होंने मध्यस्थता की प्रक्रियाओं, प्रभावी संवाद निर्माण के चरणों और विवाद समाधान में सहमति की भूमिका को विस्तार से समझाया। उन्होंने वास्तविक जीवन से जुड़े कई केस स्टडीज पर चर्चा की, जिससे छात्रों को इन तकनीकों की गहरी समझ मिली।

वैश्विक स्तर के व्यावसायिक कौशल से लैस करना एजेयू का उद्देश्य : डॉ. अंगद तिवारी
यूनिवर्सिटी के प्रतिकुलपति प्रो. (डॉ.) अंगद तिवारी ने कहा कि हमारा उद्देश्य छात्रों को वैश्विक स्तर के व्यावसायिक कौशल से लैस करना है। उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों को भविष्य के कानूनविदों को एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करने वाला बताया।
मूल्य आधारित व्यावहारिक शिक्षा ही समय की मांग : डॉ. अमित श्रीवास्तव
कुलसचिव डॉ. अमित श्रीवास्तव ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि मूल्य आधारित व्यावहारिक शिक्षा ही आज की आवश्यकता है और ऐसे आयोजन अकादमिक गुणवत्ता को नई ऊँचाई प्रदान करते हैं।
न्याय प्रणाली में बढ़ रहा है वैकल्पिक विवाद निपटान का महत्व : डॉ. ठाकुर
स्कूल ऑफ लॉ के डीन इंचार्ज प्रो. (डॉ.) प्रवीण कुमार ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान न्याय प्रणाली में वैकल्पिक विवाद निपटान (Alternative Dispute Resolution) का महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। ऐसे सत्र छात्रों को सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान नहीं, बल्कि व्यावहारिक समझ के साथ एक न्यायिक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करते हैं।
सत्र में छात्रों और फैकल्टी ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और अंत में प्रश्नोत्तरी सत्र में अपनी जिज्ञासाओं को खुलकर प्रस्तुत किया। यह आयोजन छात्रों को कानूनी व्यवहारिकता और सहमति-आधारित समाधानों की गहरी समझ प्रदान करने के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक साबित हुआ। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. अर्चिता दाश और संदीप चंदा ने किया।




