बिक्रमगंज(रोहतास) : इस्लाम के मुकद्दस महीने रमजान के अंतिम शुक्रवार यानी अलविदा जुमे की नमाज विभिन्न मस्जिदों में अदा की गई । माह- ए-रमजान के आखिरी शुक्रवार को अलविदा जुमा या जुमातुल विदा भी कहा जाता है । इस दिन रोजेदार मस्जिदों में नमाज अदा करते हैं । वैसे तो इस्लाम में शुक्रवार के दिन को बहुत ही खास माना जाता है,लेकिन रमजान महीने में पड़ने वाले जुमा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है ।

अलविदा जुमा पर हर मुसलमान के लिए नमाज अदा करना जरूरी माना जाता है क्योंकि इस्लाम में अलविदा जुमा के नमाज की खास फजीलत है । अलविदा जुमा पर दोपहर के समय नमाज अदा की जाती है । विद्युत विभाग में कार्यरत एवं बिक्रमगंज निवासी मोहम्मद आदिल खान ने बताया कि बिक्रमगंज शहर के जामा मस्जिद,कश्मीरी मस्जिद,छोटी मस्जिद,स्टेशन मस्जिद सहित विभिन्न मस्जिदों में अलविदा जुमा की नमाज अदा की गई । अलविदा जुम्मा रमजान के अंतिम शुक्रवार को मनाया जाता है,जिसे विशेष रूप से पूजा और प्रार्थनाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है । यह दिन रमजान के समापन का संकेत देता है और मुस्लिम समुदाय इसे अत्यधिक पवित्रता और श्रद्धा के साथ मनाते हैं । हदीस के अनुसार जुम्मे का दिन सप्ताह के अन्य दिनों की तुलना में अधिक फजीलत (श्रेष्ठता) रखता है और इस दिन की गई इबादतों का सवाब (पुण्य) कई गुना बढ़ जाता है ।हदीसों में जुम्मे के दिन को ईद के दिन जैसा बताया गया है । पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व.) ने फरमाया “जुम्मे के दिन की एक घड़ी ऐसी होती है जिसमें अगर कोई बंदा सच्चे दिल से दुआ करे तो अल्लाह उसकी दुआ को जरूर कुबूल करता है । इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार ईद-उल-फितर का उत्सव 10 वें शव्वाल की पहली तारीख को मनाया जाता है,जो रमजान के अंतिम दिन चांद के दीदार के बाद होता है । बताया कि यदि भारत में 30 तारीख को चांद दिखाई देता है तो ईद 31 तारीख को मनाई जाएगी । वहीं यदि चांद 31 मार्च को दिखता है तो भारत में 1 अप्रैल को ईद का पर्व मनाया जाएगा ।




