Saraikela (संजीव मेहता) : कहते हैं, कल्पना अगर सच्ची हो तो कबाड़ भी खज़ाना बन जाता है. यही साबित कर रहा है जुस्को स्कूल, साउथ पार्क, जमशेदपुर के कक्षा 7 (डी) का होनहार छात्र आरव अनुराग, जो घर के पुराने सामानों में भविष्य की तकनीक ढूंढ़ निकालता है. इसने अपनी अनोखी क्रियेटिविटी से स्कूल के शिक्षकों को हैरत में डाल दिया है. कबाड़ के सामान और घर में उपलब्ध पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से वह ऐसे-ऐसे छोटे आविष्कार कर लेता है जो किसी टेक्नोलॉजी मेले को भी मात दे दे.
पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान और घर के कबाड़ से आरव ने स्वचालित कार, रिमोट कार, मिनियेचर क्रेन, सोलर फेन, टेबल लैंप, ब्लूटुथ स्पीकर आदि बनाकर स्कूल में डेमो दे चुका है. उसकी क्लास टीचर शिखा रवि बताती है कि “किसी को कबाड़ में संभावना दिखती है, किसी को समस्या लेकिन आरव में सीखने और बनाने की इतनी ललक है कि वह कबाड़ में भी संभावनाएं खोज निकालता है. उसके बनाए मॉडल और क्रिएटिव इनोवेशन उसकी कल्पनाशक्ति के जीते-जागते उदाहरण है. उसका आत्मविश्वास उसे अलग बनाता है.” स्कूल की प्रिसिंपल मिली सिन्हा भी आरव के डेमो देखकर उत्साहित है, कहती हैं कि हर बच्चा एक खोजकर्ता है लेकिन आरव में सीखने और खोजने की अद्भुत क्षमता है.

वह कबाड़ में भी क्रिएटिविटी देख लेता है. आरव की यह सोच और मेहनत न सिर्फ उसके सहपाठियों को प्रेरित कर रही है, बल्कि स्कूल प्रबंधन को भी इस दिशा में एक विशेष नीति बनाने के लिए प्रेरित कर रही है ताकि हर बच्चे की रचनात्मक प्रतिभा को मंच मिल सके. वहीं आरव बताता है, “मुझे चीज़ों को खोलना और समझना अच्छा लगता है। जब कुछ खराब हो जाता है, मैं उसे फेंकने की बजाय नया रूप देने की कोशिश करता हूँ।” आरव अनुराग की कहानी सिर्फ एक बच्चे की नहीं, बल्कि उस नई पीढ़ी की है जो सीमित साधनों में भी अनंत संभावनाएं खोज रही है। अगर हर स्कूल ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें मंच दे, तो भारत के हर कोने से एक ‘छोटा वैज्ञानिक’ जरूर निकलेगा।





