जमशेदपुर : ज़ेंज़ी पीढ़ी जब मचलेंगे
धैर्य के सूखें समंदर
स्वार्थ झील के वासी
संवेदन विहिन पीढ़ी
बस वर्तमान में जीते हैं
परिवार, पीढ़ी से अज्ञानी
ज़ेंज़ी ज़ेंज़ी बोलेंगे
हम जीतेंगे हम जीतेंगे
हम ही जीतेंगे ।।
क्यों कि वर्तमान में
जिएंगे, हाँ जिएंगे
अपने कर्तव्य को भूलेंगे
जी हाँ सिर्फ स्व श्री ही
बोलेंगे, हाँ बोलेंगे ।।

चिंतन मंथन से दूरी
ज्ञान पिपासा रही अधूरी
भेड़ चाल पर चलने वाले
कर्म धर्म से रहें विहीन
सिर्फ आनंद ही आनंद हो
कर्म, कर्तव्य किस चिड़िया का नाम
भेड़ चाल से भीड़ बनेंगे
और के आज्ञा का पालन
पालना नहीं पालेंगे
चार पैसे पर बिकने वाले
ज़ेंज़ी हैं ये ज़ेंज़ी हैं ।।
नई मुल्यांकण गढ़ने वाले
सिर्फ मार काट मचाएंगे
दूजे को लाभ खिलाएंगे
स्वस्थ चिंतन से रखते दूरी
पढ़ना लिखना कागज की डिग्री
विद्या नहीं हुई है पूरी
अधकचरे ज्ञान से भूली भूरी
कैसे भार उठाएंगे
दंगा की मजदूरी लेकर
हो जातें हैं फिर से गुम,
हम ज़ेंज़ी हैं हम ज़ेंज़ी हैं ।।
हाँ नई पीढ़ी में ज़ेंज़ी बोलेंगे
भीड़ तंत्र से जुड़े रहेंगे
मूल तत्व से दूरी
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर जीने वाले
संबंध संवेदना से रखते दूरी
लॉज होटल में संपोषित होकर
विज्ञान का करतें दुरुपयोग
खंड खंड में जीने वाले
खंडित संस्कृति के ही
द्योतक बनकर
ज़ेंज़ी ज़ेंज़ी कहलाएंगे,
हम ज़ेंज़ी हैं हम ज़ेंज़ी हैं।।





