रांची : भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद की 141वीं जयंती इव। अधिवक्ता दिवस पर जमशेदपुर बार एसोसिएशन प्रांगण में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर बार एसोसिएशन के सभी वरिष्ठ अधिवक्ता, अधिकारी एवं अन्य गणमान्य गण मौजूद थे। यह कार्यक्रम साहित्यकार, आंदोलनकारी और भारत रत्न से नवाजे गए भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के जयंती के अवसर पर अधिवक्ता दिवस के रूप में मनाया जाता है।
जिसे लेकर इस वर्ष न्याय कार्य में निरंतर योगदान देने वाले 16 वरिष्ठ अधिवक्ताओं को संगठन की ओर से अंग वस्त्र, फूलों की गुलदस्ता और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। इस मौके बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रथिंद्र नाथ दास ने कहा कि डॉ राजेंद्र प्रसाद प्रथम राष्ट्रपति होने के साथ अमूल्य गुण के धनी थे जिसे लेकर देश के अधिवक्ता उनकी जयंती को अधिवक्ता दिवस के रूप में मानते हैं जो अधिवक्ताओं के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण होता है। वही इस मौके पर एसोसिएशन के पूर्व महासचिव अनिल तिवारी ने कहा कि देश के अधिवक्ता न्याय दिलाने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं लेकिन वे असुरक्षित है, इसे लेकर कई वर्षों से प्रोटेक्शन एक्ट की मांग कर रहे हैं ताकि आए दिन विरोधियों के द्वारा पहुंचाए जा रहे नुकसान से सुरक्षित हो सके।

प्रोटेक्शन एक्ट लागू होने से अधिवक्ताओं को ग्रैजुएटी ,प्रोविडेंट फंड एवं अन्य सुविधा प्राप्त होगी जो वर्तमान में उन्हें नहीं मिल रही है। बावजूद अनिल तिवारी ने झारखंड सरकार का भी धन्यवाद करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के पहल पर पिछले दिनों अधिवक्ताओं के लिए 5 लाख का स्वास्थ्य बीमा लागू की है,वैसे यह काफी नहीं है लेकिन फिर भी सरकार की इस पहल का सम्मान करते हैं। वही संयुक्त सचिव प्रशासन की विनीता सिंह ने कहा कि इस तरह का कार्यक्रम का आयोजन से अधिवक्ताओं में एक जुटता दर्शाता है लेकिन उन्होंने न्याय प्रक्रिया को और सरल बनाने की बात कही। अधिवक्ता दिन-रात न्याय दिलाने के लिए कार्य करते हैं लेकिन प्रक्रिया सरल नहीं होने की वजह से कई मामले लंबित हो जा रहे हैं लेकिन पिछले कुछ वर्षों में डालसा और फास्ट ट्रैक के माध्यम से कई मामलों का निपटारा किया गया लेकिन इस प्रक्रिया को और भी सरल बनाने की आवश्यकता है जिससे पीड़ितों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके। इधर लॉयर्स डिफेंस की ओर से भी साकची स्थित धालभूम क्लब में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें अधिक वक्ताओं की वर्तमान स्थिति पर संगोष्ठी एवं परिचर्चा की गई जिसमें मुख्य अतिथि एवं वक्ताओं ने अपनी बातों को विस्तार से रखी। इस मौके पर काफी संख्या में शहर के अधिवक्ता मौजूद थे।






