जमशेदपुर : मकर संक्रांति में तिलकुट का काफी महत्व है जिसे लेकर तिलकुट से जमशेदपुर बाजार पट चुका है। विगत कई दिनों से जमशेदपुर में कई दुकानदार इसके निर्माण में जुट गए थे। जिसे बनाने के लिए बिहार के गया से कारीगर मंगाए गए हैं। ऐसा ही एक जमशेदपुर के बारीडीह बाजार में तिलकुट का कारोबार करने वाले मिथिलेश कुमार के यहां कारीगरों द्वारा दिन रात कड़ी मेहनत कर इसका निर्माण कर रहे हैं। जहां से शहर के विभिन्न दुकानों में सप्लाई की जाती है। तिलकुट का नामांकरण और इसके बनाने की विधि के बारे में बताया जाता है, कि सबसे पहले तिल को कढ़ाई में भूंजा जाता है। उसके बाद गुड को पकाकर लाई बना दी जाती है, फिर उसमें तिल को अच्छी तरह से मिला लेने के बाद उसे एक लोहे के वस्तु से कूटने पर जो आकर बनती है, उसे ही तिलकुट कहा जाता है। बहरहाल संक्रांति में इसका महत्व क्यों है।

इसे मुकेश नामक जानकर का कहना है, कि प्रत्येक महीने सूर्य अपनी राशि बदलता है। लेकिन 14 और 15 जनवरी को सूर्य धनु राशि से मकर में प्रवेश करता है, इसी वजह से इस दिन मकर संक्रांति कहा जाता है। मकर देवताओं की राशि है। इसलिए शनि देव को तिल और गुड़ के व्यंजन से पूजा जाता है, इसलिए इसका महत्व और बढ़ जाता है। गुड से बने तिलकुट, बादाम पट्टी, छुड़ा और मुड़ी का लाइ जैसे के व्यंजन का भी इस पूजन में इस्तेमाल की जाती है। फिलहाल इस पर्व को लेकर इन व्यंजनों से शहर का बाजार पट चुका है, और लोग इसकी खरीदारी भी शुरू कर दिए है।





